भारत की समृद्ध वनस्पति विरासत के संरक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (पीआरएफ) लगातार कार्य कर रहा है। पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए सर्वेक्षणों के दौरान अब तक 100 से अधिक नए पादप अभिलेख भारत और विभिन्न राज्यों के वनस्पति अभिलेखों में दर्ज किए हैं। वहीं, सर्वेक्षण और अनुसंधान के दौरान एकत्र किए गए 27 हजार से अधिक पादप नमूनों को पतंजलि पादपालय (हर्बेरियम) में संरक्षित किया गया है।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण के नेतृत्व और मार्गदर्शन में पीआरएफ के वैज्ञानिक देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में पादप सर्वेक्षण और अनुसंधान कर रहे हैं। राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में सर्वेक्षण किया गया है। इन सर्वेक्षणों के दौरान मिले पादपों को वैज्ञानिक रूप से दर्ज किया गया है।
पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2024 में कैम्पेन्यूला डेन्सीसिलिएटा के रूप में एक नई पादप प्रजाति भी दुनिया के सामने प्रस्तुत की। इसके अलावा विभिन्न राज्यों से प्राप्त कई नई पादप प्रजातियों का अध्ययन और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण भी किया जा रहा है। पीआरएफ के पादप अभिलेखों को क्यू बॉटनिकल गार्डेन के डिजिटल डाटाबेस और ऑनलाइन पोर्टल में भी स्थान मिला है।
अष्टवर्ग से राष्ट्रपति भवन तक हुआ सर्वेक्षण
आचार्य बालकृष्ण ने अष्टवर्ग के पादपों की खोज और पहचान के साथ हर्बेरियम तैयार करने का कार्य किया। इसके आधार पर ‘अष्टवर्ग रहस्य’ पुस्तक का हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशन भी किया गया। पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने हरियाणा के मोरनी हिल्स समेत उत्तराखंड के जनजातीय क्षेत्रों में भी पादप सर्वेक्षण किया। इस दौरान स्थानीय जनजातीय समुदायों द्वारा उपयोग किए जाने वाले कई पादपों का भी दस्तावेजीकरण किया गया।
नमामि गंगे परियोजना के तहत वर्ष 2023-24 में गोमुख से गंगासागर तक गंगा के दोनों किनारों पर पादप सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान कई पादपों को संबंधित राज्यों के वनस्पति अभिलेख में दर्ज किया गया।
राष्ट्रपति भवन में दर्ज किए 620 से अधिक पौधे
पीआरएफ के वैज्ञानिकों ने राष्ट्रपति भवन में पहली बार व्यापक पादप सर्वेक्षण करते हुए 620 से अधिक पौधों को रिकॉर्ड किया। 2 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण की मौजूदगी में ‘फ्लोरा ऑफ प्रेसिडेंट हाउस’ और ‘मेडिसिनल प्लांट्स ऑफ प्रेसिडेंट हाउस’ पुस्तकों का विमोचन किया। इस दौरान दिल्ली के पादपों की एक चेकलिस्ट भी प्रकाशित की गई।
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश के पाके-कसांग जिले के सिजोसा क्षेत्र में भी सर्वेक्षण किया गया, जिसमें कई पादपों को भारत और राज्य के वनस्पति अभिलेख में दर्ज किया गया।
हरिद्वार की वनस्पति पर भी तैयार हो रहा दस्तावेज
स्वामी रामदेव के संरक्षण और आचार्य बालकृष्ण के मार्गदर्शन में अब हरिद्वार जिले का पादप सर्वेक्षण भी किया जा रहा है। इसके तहत ‘फ्लोरा ऑफ हरिद्वार’ तैयार करने का कार्य प्रगति पर है। सर्वेक्षण के दौरान उत्तराखंड के वनस्पति अभिलेख में भी कई पौधों को दर्ज किया गया है
“नई पादप प्रजातियों और नए अभिलेखों की खोज केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि जैव विविधता संरक्षण, औषधीय पौधों की पहचान, पर्यावरणीय अध्ययन और भविष्य के वानस्पतिक अनुसंधान की मजबूत आधारशिला है। प्रत्येक नई खोज भारत की प्राकृतिक विरासत को वैज्ञानिक रूप से समृद्ध करती है। इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी ज्ञान-संपदा तैयार होगी।”




