नीट-यूजी में फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से एमबीबीएस में दाखिला दिलाने के मामले में एसआईटी ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मेरठ की एक एजुकेशन कंसल्टेंसी का संचालक और हरिद्वार के लक्सर निवासी एक छात्रा का पिता शामिल है। पुलिस के अनुसार मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, एसआईटी जांच में सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित प्रमाणपत्र के आधार पर मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लिया था। जांच के दौरान प्रमाणपत्रों और नीट में लगाए गए दस्तावेजों में दर्ज पतों में अंतर मिला। इसके बाद एसआईटी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों से दाखिले के मूल दस्तावेज कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की।
जांच में एसआईटी ने मेरठ में एजुकेशन कंसल्टेंसी चलाने वाले रूपेश पंडित और लक्सर के बहादरपुर खादर निवासी अरविंद कुमार को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, अरविंद ने अपनी बेटी के एमबीबीएस दाखिले के लिए रूपेश से संपर्क किया था। आरोप है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित कोटे से दाखिला दिलाने के लिए प्रति सीट 45 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था और 20 लाख रुपये एडवांस लिए गए थे।
एसआईटी अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाणपत्र तैयार कराने में और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही प्रमाणपत्र सरकारी पोर्टल पर किसने अपलोड किए, सत्यापन की प्रक्रिया कैसे हुई और मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के दौरान दस्तावेज किस स्तर पर स्वीकार किए गए, इसकी भी जांच की जा रही है।
इस मामले में प्रशासन की जांच के बाद फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर हुए कुछ एमबीबीएस दाखिले पहले ही निरस्त किए जा चुके हैं। वहीं राज्य कोटे के तहत आरक्षण का लाभ लेने वाले अन्य अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की भी जांच का दायरा बढ़ाया गया है।




