गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पतंजलि योगपीठ के फेज-दो स्थित योग भवन में गुरुवार को भव्य आयोजन हुआ। इस दौरान 111 कुण्डीय महायज्ञ एवं आचार्यकुलम् में 1176 विद्यार्थियों का वैदिक रीति से उपनयन एवं वेदारंभ संस्कार संपन्न कराया गया। कार्यक्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से आशीर्वाद प्राप्त किया।
स्वामी रामदेव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात ब्रह्मस्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को फिल्मी सितारों को नहीं, बल्कि अपने माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी और श्रीराम, श्रीकृष्ण जैसे महापुरुषों को अपना आदर्श और रोल मॉडल बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय संस्कृति की आत्मा है और इसे गुलामी बताना अज्ञानता है।
आचार्य बालकृष्ण ने गुरु पूर्णिमा को सकारात्मकता, पुरुषार्थ और संस्कारों का पर्व बताते हुए कहा कि गुरु के बताए मार्ग पर चलने वाला व्यक्ति कभी भटक नहीं सकता। उन्होंने महापुरुषों के आदर्शों पर चलने का आह्वान किया तथा स्वामी रामदेव के चरण स्पर्श कर गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।
आचार्यकुलम् में उपाध्यक्षा डॉ. ऋतंभरा शास्त्री एवं प्राचार्या स्वाति मुंशी ने विद्यार्थियों को भिक्षादान व आशीर्वाद प्रदान किया। कार्यक्रम में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. एन.पी. सिंह, पतंजलि सिविल सर्विस अकादमी के प्रमुख अवध ओझा, पतंजलि आयुर्वेद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल, उप-प्राचार्य तापस कुमार बेरा, समन्वयिका दीपा देवी, अमित दानी सहित पतंजलि के शिक्षा प्रकल्पों के प्रमुख, आचार्य, संन्यासी, कर्मचारी, विद्यार्थी एवं अभिभावक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।




