पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित पञ्चमी राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता (2026-27) के सम्मान समारोह में देशभर के गुरुकुलों, विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के बीच लगभग 50 लाख रुपये की छात्रवृत्ति एवं पुरस्कार राशि वितरित की गई।
पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति स्वामी रामदेव ने कहा कि भारत की वास्तविक पहचान उसकी सनातन ज्ञान परंपरा, संस्कृत, वेद, उपनिषद और शास्त्रों से जुड़ी है। उन्होंने कहा कि पतंजलि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि युवाओं में संस्कार, भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन और राष्ट्रभाव का विकास करना है।
मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह आहलूवालिया ने भारतीय संस्कृति और संस्कृत शिक्षा के संरक्षण में पतंजलि विश्वविद्यालय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि शास्त्रों का अध्ययन चरित्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार है।
प्रतियोगिता में देशभर के अनेक प्रतिष्ठित गुरुकुलों एवं शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया। राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले वेदभानु, साध्वी देववाणी, साध्वी देवांशी, कृष्णाशीष, जाह्नवी सहित कई विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में मानविकी संकाय की अधिष्ठाता साध्वी डॉ. देवप्रिया, प्रो-वाइस चांसलर प्रो. (डॉ.) मयंक अग्रवाल, डीन रिसर्च डॉ. ऋत्विक बिसारिया, परीक्षा नियंत्रक ए.के. सिंह, शिक्षक, शोधार्थी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। समारोह में भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत एवं शास्त्रीय अध्ययन के संरक्षण और संवर्धन का सामूहिक संकल्प भी दोहराया गया।




