हरिद्वार। उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UKRERA) देहरादून ने जुर्स कंट्री ज्वालापुर टाउनशिप के निवासियों के पक्ष में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने बिल्डर वर्धमान डेवलपर्स द्वारा स्टिल्ट और ओपन एरिया को अवैध रूप से पार्किंग के तौर पर बेचने की कार्रवाई को पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित कर दिया है।
कोर्ट के प्रमुख आदेश:
– बिल्डर द्वारा सामुदायिक क्षेत्र (स्टिल्ट + ओपन स्पेस) में बनाई गई पार्किंग की बिक्री तत्काल प्रभाव से अवैध और रद्द।
– 30 दिनों के अंदर सभी पात्र फ्लैट मालिकों को पार्किंग नंबर सहित वैध आबंटन पत्र जारी करना अनिवार्य।
– अवैध रूप से वसूले गए पार्किंग शुल्क + GST/सर्विस टैक्स की पूरी राशि 45 दिनों में 10.85% वार्षिक ब्याज सहित वापस करना होगा। देरी पर अतिरिक्त ब्याज देय।
– आगे इस तरह की कोई भी अवैध बिक्री नहीं की जा सकेगी।
यह मामला वर्ष 2021 से UKRERA में लंबित था। जुर्स कंट्री रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव राय, उपाध्यक्ष अरविन्द सिंह, महासचिव जितेन्द्र कुमार शर्मा, सचिव शुभाशीष देवनाथ, कोषाध्यक्ष थिरेन्द्र जौहरी और जनसम्पर्क अधिकारी अजय दुर्ग के नेतृत्व में सैकड़ों परिवारों ने एकजुट होकर लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।
आज हरिद्वार प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में निवासियों ने इस फैसले को “सच की जीत” और “खरीदारों के अधिकारों की बड़ी विजय” बताया। उनका कहना था कि यह आदेश न सिर्फ जुर्स कंट्री के 1000+ परिवारों को राहत देगा, बल्कि पूरे उत्तराखंड और देश में बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ लड़ रहे हजारों घर खरीदारों के लिए मिसाल बनेगा।
निवासियों ने UKRERA के चेयरमैन और सदस्यों का आभार जताते हुए कहा कि यह फैसला रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और खरीदारों के हक की नई मिसाल कायम करेगा।




