चारधाम यात्रा 2026 के तहत धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी, गाडू घड़ा (तेल कलश) तथा भगवान कुबेर और उद्धव की डोलियां बदरीनाथ धाम के लिए विधि-विधान के साथ रवाना हो गईं।
नृसिंह मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद यह पवित्र यात्रा शुरू हुई। इस दौरान भजनों, सैन्य बैंड और श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा।
बताया गया कि यात्रा दल ने पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी में रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन बदरीनाथ धाम की ओर प्रस्थान किया। इस यात्रा में बदरीनाथ धाम के रावल भी शामिल रहे।
चारधाम यात्रा के क्रम में यह धार्मिक परंपरा हर वर्ष निभाई जाती है, जिसके बाद तय तिथि पर मंदिर के कपाट खोले जाते हैं। इस वर्ष बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।
इस पावन यात्रा के रवाना होने के साथ ही चारधाम यात्रा की तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है।




