13 जून। पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन (पीआरएफ), समृद्ध ग्राम एवं उत्तराखंड स्टेट रूरल लाइवलीहुड मिशन (यूएसआरएलएम) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित “धरती का डॉक्टर (DKD) मृदा परीक्षण तकनीक” विषयक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुक्रवार को सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। 11 से 13 जून तक पतंजलि परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण में हरिद्वार जनपद की कृषि सखियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों, विशेषकर ग्रामीण महिला कृषकों को आधुनिक मृदा विज्ञान से जोड़ना तथा मिट्टी की जांच के महत्व से अवगत कराना था। प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को ‘धरती का डॉक्टर’ तकनीक के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता जांचने और फसल के अनुरूप उर्वरक चयन की जानकारी दी गई, जिससे खेती की लागत कम कर आय बढ़ाई जा सके।
उद्घाटन सत्र में डॉ. वेदप्रिया आर्या ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पतंजलि रिसर्च फाउंडेशन की कृषि एवं ग्रामीण विकास गतिविधियों की जानकारी दी। डॉ. यशपाल सिंह ने मृदा परीक्षण के वैज्ञानिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मिट्टी की जांच से ही किसानों की आय में वृद्धि संभव है। उन्होंने बताया कि नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश तथा सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी के बिना खेती करना अनुमान के आधार पर खेती करने जैसा है।
दूसरे दिन डॉ. के.एन. शर्मा एवं कृषि अनुसंधान केंद्र (एआरसी) की टीम ने डीकेडी किट की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया। विशेषज्ञों ने मृदा परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फसलवार उर्वरक अनुशंसा प्रणाली की जानकारी भी दी।
समापन सत्र में सुशील कुमार अग्रवाल ने ग्रामीण युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों पर मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने स्वयं मिट्टी के नमूने लेने से लेकर परीक्षण रिपोर्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया का अभ्यास किया।
इस अवसर पर पतंजलि के महासचिव डॉ. आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि का संकल्प रासायनिक खेती से मुक्ति और प्राकृतिक समृद्धि की ओर लौटना है। उन्होंने कहा कि जब किसान की मिट्टी स्वस्थ होगी, तभी शुद्ध अन्न, निरोगी परिवार और आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा।
प्रशिक्षण के अंत में प्रतिभागियों का मूल्यांकन कर सफल अभ्यर्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए तथा उन्हें डीकेडी किट के साथ क्षेत्र में कार्य प्रारंभ करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।




