हरिद्वार, 13 जून। पतंजलि ने भारतीय संस्कृति, आधुनिक विज्ञान और राष्ट्रसेवा की भावना से प्रेरित प्रशासनिक अधिकारियों के निर्माण के उद्देश्य से पतंजलि सिविल सेवा अकादमी के शुभारंभ की घोषणा की है। अकादमी का उद्देश्य आईएएस, आईपीएस एवं अन्य केंद्रीय सेवाओं के लिए ऐसे अधिकारियों को तैयार करना है, जो भारतीय मूल्यों और संविधान की भावना के अनुरूप जनसेवा को अपना सर्वोच्च कर्तव्य मानें।
योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र और नेतृत्व निर्माण का सबसे प्रभावी साधन है। उन्होंने बताया कि अकादमी में आध्यात्मिक ज्ञान, प्रशासनिक उत्कृष्टता और शैक्षणिक कठोरता पर आधारित “त्रि-शिक्षा” मॉडल लागू किया जाएगा। पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसमें योग, प्राणायाम और नैतिक मूल्यों को विशेष स्थान दिया गया है।
पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ. एन.पी. सिंह ने कहा कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था को औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त कर जनसेवा केंद्रित बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि अकादमी अधिकारियों में कर्तव्यनिष्ठा, संवेदनशीलता और लोककल्याण की भावना विकसित करने का कार्य करेगी।
देश के प्रसिद्ध शिक्षाविद् एवं सिविल सेवा मार्गदर्शक अवध ओझा अकादमी का नेतृत्व करेंगे। उन्होंने कहा कि संस्थान का उद्देश्य केवल परीक्षा की तैयारी कराना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में चिंतन क्षमता, व्यवहारिक बुद्धिमत्ता और नेतृत्व कौशल विकसित करना है। उन्होंने बताया कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों के सहयोग से विद्यार्थियों को उच्चस्तरीय मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाएगा।
पतंजलि विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित यह अकादमी पूर्णतः आवासीय होगी, जहां विद्यार्थियों को सात्विक वातावरण, आधुनिक शिक्षण संसाधन, खेल सुविधाएं तथा व्यक्तित्व विकास के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। अकादमी ने मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति एवं विशेष पुरस्कारों की भी घोषणा की है।
इस अवसर पर पतंजलि विश्वविद्यालय की डीन साध्वी देवप्रिया, प्रो-वाइस चांसलर मयंक अग्रवाल, रजिस्ट्रार श्री सक्सेना सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।




