रानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगे काली सेना के परमाध्यक्ष स्वामी आनंद स्वरूप, आरक्षण, एफआईआर और मंदिर नियंत्रण पर दिए तीखे बयान
हरिद्वार। काली सेना के परमाध्यक्ष एवं पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप महाराज ने आगामी विधानसभा चुनाव में रानीपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। हिंदुस्तान दर्शन के पत्रकार सचिन तिवारी से विशेष बातचीत में स्वामी आनंद स्वरूप ने राजनीति में प्रवेश, चुनाव लड़ने की रणनीति, आरक्षण व्यवस्था, अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर और मठ-मंदिरों के सरकारी नियंत्रण सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी राय खुलकर रखी।
स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि वह पिछले 26 वर्षों से हरिद्वार में रह रहे हैं और उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए रानीपुर सीट को चुना है। उन्होंने रानीपुर विधानसभा क्षेत्र को चुनौतीपूर्ण बताते हुए क्षेत्र में विकास कार्यों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की समस्याओं, विशेष रूप से सड़कों और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी परेशानियों को दूर करने के लिए वह चुनाव मैदान में उतरना चाहते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी राजनीतिक दल से टिकट मांगने नहीं जाएंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल उनके सिद्धांतों और विचारधारा का सम्मान करेगा, उसके साथ चुनावी स्तर पर विचार किया जा सकता है। उन्होंने अपने संभावित राजनीतिक एजेंडे के बारे में बताते हुए उत्तराखंड से पलायन रोकने, राज्य को आधिकारिक रूप से देवभूमि घोषित कराने, अवैध रूप से रह रहे लोगों के मुद्दे पर कार्रवाई और हिमालय संरक्षण से संबंधित कानून लागू करने की बात कही।
आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी स्वामी आनंद स्वरूप ने अपना स्पष्ट मत रखा। उन्होंने कहा कि आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति होना चाहिए और व्यवस्था में योग्यता को भी प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग में भी अन्य पिछड़ा वर्ग की तरह क्रीमी लेयर की व्यवस्था लागू किए जाने की बात कही, ताकि आरक्षण का लाभ वास्तविक रूप से जरूरतमंद और पात्र लोगों तक पहुंच सके। यूजीसी से जुड़े विषयों पर भी उन्होंने अपनी राय रखते हुए शिक्षा व्यवस्था में योग्यता और समान अवसर को महत्वपूर्ण बताया।
अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर के संबंध में स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने संबंधित मामले को राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए आरोप लगाए और कहा कि संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत उन्हें अपनी बात रखने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि सत्य और अपने विचारों के लिए आवाज उठाने से वह एफआईआर से भयभीत नहीं हैं।
मठ-मंदिरों के सरकारी नियंत्रण के मुद्दे पर भी उन्होंने तीखा रुख अपनाया। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि देश के प्रमुख मठों और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर उन्हें धर्माचार्यों एवं संबंधित मठाधीशों की व्यवस्था में सौंपा जाना चाहिए। उनका कहना है कि सरकारी हस्तक्षेप के कारण मंदिरों की व्यवस्थाओं में भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती रहती हैं। उन्होंने मंदिरों में आने वाले चढ़ावे और दान की पारदर्शी व्यवस्था की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
स्वामी आनंद स्वरूप के इन बयानों के बाद रानीपुर विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में उनकी संभावित उम्मीदवारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि चुनाव में उनका राजनीतिक भविष्य क्या होगा और वह निर्दलीय मैदान में उतरेंगे या किसी राजनीतिक दल के साथ जाएंगे, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल उनके चुनाव लड़ने के ऐलान और आरक्षण, एफआईआर तथा मंदिरों के सरकारी नियंत्रण जैसे मुद्दों पर दिए गए बयानों ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा को बढ़ा दिया है।




