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यूजीसी के कथित “काला कानून” के विरोध व जन एकता पर जोर

हरिद्वार। जन सामान्य मंच की एक महत्वपूर्ण बैठक में देश और समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। बैठक में मंच के कार्यकर्ताओं एवं बुद्धिजीवियों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर अपने विचार रखे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए डॉ. प्रेमचंद शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में जब विभिन्न नीतियों को लेकर आमजन में भ्रम और असंतोष का माहौल है, ऐसे में जन सामान्य मंच जैसे संगठनों की भूमिका समाज में जागरूकता फैलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।

मुख्य वक्ता जुगुल किशोर तिवारी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रस्तावित नियमों को “काला कानून” बताते हुए इसकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था शिक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकती है और छात्रों व शिक्षकों के हितों के खिलाफ है। उन्होंने सरकार से ऐसे निर्णयों से पहले व्यापक जनसंवाद करने की मांग की।

राष्ट्रीय महामंत्री एडवोकेट राजेंद्र पांडेय ने कहा कि जनहित के विरुद्ध किसी भी कानून का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। उन्होंने यूजीसी के प्रस्तावित ढांचे में कई खामियां बताते हुए कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

इंजीनियर विनोद प्रसाद नौटियाल ने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताते हुए युवाओं से जागरूक रहने और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का आह्वान किया। अन्य वक्ताओं ने भी समाज में एकता की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि जाति, धर्म और क्षेत्र के आधार पर हो रहे विभाजन का मुकाबला केवल एकजुट होकर ही किया जा सकता है।

बैठक का संचालन बालकृष्ण शास्त्री ने किया। उन्होंने कहा कि यूजीसी के कथित “काला कानून” का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा तथा गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक किया जाएगा।

इस अवसर पर सूर्य प्रकाश भट्ट, सुरेश कुमार शर्मा, महिपाल सिंह, ललित पांडे, शेखर शुक्ला, सरिता त्रिपाठी सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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