मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि लागत में भारी वृद्धि और बदलते आर्थिक माहौल के कारण ये योजनाएँ अब आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रहीं, इसलिए इन्हें रोकना जरूरी था।
फडणवीस ने बताया कि राज्य सरकार ने शहरी विकास विभाग के तहत पहले से स्वीकृत कई परियोजनाओं की समीक्षा की और पाया कि खर्च बढ़ने तथा परिस्थितियों के बदलने के कारण इन परियोजनाओं को आगे बढ़ाना सार्वजनिक धन के हित में नहीं होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम सोच-समझकर लिया गया है ताकि जनता का पैसा बेहतर उपयोग हो।
वहीं कांग्रेस ने इस निर्णय पर तीखा हमला किया है और आरोप लगाया है कि सरकार द्वारा लिया गया यह कदम महज एक राजनीतिक चाल है जिसे उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शहरी विकास विभाग को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि ऐसा कोई बड़ा मतभेद Mahayuti सरकार में है और इस फैसले को सरकार के भीतरी संघर्ष का संकेत बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद नगर निकाय चुनावों के ठीक पहले उभरा है, जिससे राज्य में चुनावी राजनीति और भी गर्मा गई है।




