उत्तराखंड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन की हरिद्वार इकाई की ओर से होटल पार्क ग्रैंड में ‘पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई): चुनौतियां एवं अवसर’ विषय पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें पत्रकारिता के क्षेत्र में तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, एआई के व्यावहारिक उपयोग और इससे जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि एआई पत्रकारिता को अधिक तेज और प्रभावी बना सकता है, लेकिन खबरों की विश्वसनीयता, तथ्यात्मक शुद्धता और संपादकीय विवेक के लिए मानवीय भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने की। उत्तराखंड सरकार के राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि और अनुसूचित जाति आयोग के सदस्य मनोज गौतम मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वरिष्ठ पत्रकार एवं एआई विशेषज्ञ पीयूष पाण्डेय ने मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकारिता में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और सावधानियों पर विस्तार से जानकारी दी। कार्यक्रम को यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा का सानिध्य प्राप्त हुआ। इस दौरान जगदीश लाल पाहवा और डॉ. विशाल गर्ग सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
एआई से बढ़ेगी पत्रकारों की कार्यक्षमता
मुख्य वक्ता पीयूष पाण्डेय ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधुनिक पत्रकारिता का एक शक्तिशाली उपकरण है। इसके माध्यम से बड़े डेटा का विश्लेषण, ऑडियो-वीडियो का ट्रांसक्रिप्शन, भाषा अनुवाद और समाचारों के शुरुआती ड्राफ्ट तैयार करने जैसे कार्य तेजी से किए जा सकते हैं। इससे पत्रकारों की कार्यक्षमता और रिपोर्टिंग की गति बढ़ सकती है।
उन्होंने कहा कि एआई से तैयार सामग्री को प्रकाशित करने से पहले तथ्यों और स्रोतों का सत्यापन करना अनिवार्य है। एआई उपलब्ध डेटा के आधार पर परिणाम देता है, इसलिए पत्रकारों को डीपफेक और एआई से तैयार फर्जी खबरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए। एआई पत्रकार का विकल्प नहीं, बल्कि सहायक उपकरण है। खबर की सत्यता जांचने और अंतिम संपादकीय निर्णय लेने की जिम्मेदारी पत्रकार की ही होती है।
पत्रकारिता की आत्मा सत्यनिष्ठा और मानवीय संवेदना
महामंडलेश्वर करौली शंकर महादेव महाराज ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का सशक्त माध्यम है, लेकिन पत्रकारिता की आत्मा मानवीय संवेदना, विवेक और सत्यनिष्ठा में निहित है। तकनीक का उपयोग सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए। इसके नकारात्मक उपयोग का प्रभाव व्यक्ति और समाज दोनों पर पड़ सकता है। मशीन सूचनाएं और आंकड़े तेजी से जुटा सकती है, लेकिन सामाजिक चेतना और सत्य की परख के लिए सजग पत्रकार की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने पत्रकारों से तकनीक से डरने के बजाय उसका सदुपयोग करने का आह्वान किया।
तकनीकी बदलाव को अवसर में बदलें पत्रकार: अरुण शर्मा
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अरुण शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय डिजिटल बदलाव का दौर है। पत्रकारों को समय के साथ तकनीकी नवाचार अपनाने होंगे, ताकि वे प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारिता को समाप्त करने के बजाय खोजी पत्रकारिता, डेटा विश्लेषण और त्वरित रिपोर्टिंग को अधिक प्रभावी बनाने में मदद कर सकता है। यूनियन का प्रयास है कि पत्रकार तकनीकी चुनौतियों को अवसरों में बदलें और भविष्य की पत्रकारिता के लिए स्वयं को तैयार करें।
कार्यक्रम का संचालन यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष रजनीकांत शुक्ला ने किया। इस अवसर पर जिला अध्यक्ष संजय आर्य, कार्यकारी अध्यक्ष संजय रावल, महामंत्री अमित गुप्ता, कोषाध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी, संयोजक अनिरुद्ध भाटी और कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष अविक्षित रमन सहित यूनियन के अनेक पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। संगोष्ठी में पत्रकारिता के बदलते स्वरूप और एआई के जिम्मेदार उपयोग को लेकर विचार साझा किए गए।



