मेला-2027 को भव्य, सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने के लिए हरिद्वार में अवस्थापना विकास के कार्य तेजी से चल रहे हैं। कुंभ से जुड़े 126 कार्यों के लिए करीब 709.23 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। चार जिलों में फैले 32 सेक्टरों वाले मेला क्षेत्र में निर्माण और अन्य व्यवस्थाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के लिए मेला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।
मंगलवार को मेला नियंत्रण भवन स्थित सीसीआर सभागार में आयोजित प्रेस ब्रीफिंग में मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कि कुंभ से जुड़े प्रमुख कार्य तय टाइमलाइन के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कार्यों को केवल समय पर पूरा करना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि निर्माण में गुणवत्ता का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा, सुगम आवागमन और सुव्यवस्था प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने बताया कि कुंभ की तैयारियों के तहत सड़क, पुल, घाट, पार्किंग, पेयजल, विद्युत, चिकित्सा, स्वच्छता, सैनिटेशन, यातायात और सौंदर्यीकरण से जुड़े कार्य किए जा रहे हैं। अधिकांश योजनाएं स्थायी प्रकृति की हैं, जिनका लाभ कुंभ के बाद भी हरिद्वार के लोगों और श्रद्धालुओं को मिलेगा।
पांच बड़े पुलों समेत कई कार्य प्रगति पर
श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए फुटपाथ विकसित किए जा रहे हैं। घाटों के विस्तार और सुधार के साथ पैदल यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रमुख मार्गों के सुदृढ़ीकरण के साथ आंतरिक सड़कों और गलियों के सुधार की योजनाएं भी चल रही हैं। यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए पांच बड़े पुलों के निर्माण सहित विभिन्न अवस्थापना कार्य प्रगति पर हैं।
मेलाधिकारी ने कहा कि शहर के प्रवेश मार्गों से लेकर घाटों तक श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सड़क, फुटपाथ, पुल, घाट और यातायात व्यवस्थाओं को आपस में जोड़कर समग्र विकास किया जा रहा है।
32 सेक्टरों में अस्थायी व्यवस्थाओं की तैयारी
मेला क्षेत्र के सभी 32 सेक्टरों में ड्रेसिंग और लेवलिंग का काम शुरू कर दिया गया है। वर्षाकाल समाप्त होने के बाद अस्थायी सड़क, बिजली, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश और पार्किंग समेत अन्य व्यवस्थाओं के कार्यों में तेजी लाई जाएगी। इसके लिए संबंधित विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के साथ समन्वय कर तैयारियां की जा रही हैं।
निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करने के लिए बहुस्तरीय निगरानी व्यवस्था बनाई गई है। अधिकारी नियमित स्थलीय निरीक्षण कर प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा करेंगे।
ग्रीन कुंभ पर भी रहेगा जोर
कुंभ की तैयारियों में ग्रीन कुंभ की अवधारणा को भी शामिल किया गया है। पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र, ऊर्जा दक्षता, जल संरक्षण, स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेलाधिकारी ने कहा कि कुंभ हरिद्वार के लिए सिर्फ आयोजन नहीं, बल्कि शहर की दीर्घकालिक अवस्थापना को मजबूत करने का अवसर भी है।




