एसएमजेएन पीजी कॉलेज में शनिवार को देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस हर्षोल्लास और राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराकर समारोह का शुभारंभ किया। इसके बाद सामूहिक रूप से वंदे मातरम् और राष्ट्रगान का गायन हुआ।
मुख्य अतिथि श्रीमहंत डॉ. रविंद्र पुरी ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस देश के उन महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग, तपस्या और बलिदान को स्मरण करने का अवसर है, जिनके संघर्ष से देश को आजादी मिली। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। युवाओं को अपनी ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग राष्ट्र निर्माण, सामाजिक सेवा तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने में करना चाहिए।
उन्होंने विद्यार्थियों से भारतीय संस्कृति, परंपरा और आध्यात्मिक विरासत को आत्मसात करते हुए आधुनिक ज्ञान-विज्ञान के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए देश के विकास में योगदान देना चाहिए।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. सुनील कुमार बत्रा ने स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए उच्च शिक्षा निदेशक की ओर से भेजे गए संदेश को पढ़कर सुनाया। उन्होंने कहा कि आजादी केवल अधिकारों का उत्सव नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने और उनका निर्वहन करने का अवसर भी है। विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ अनुशासन, नैतिक मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और राष्ट्रप्रेम को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए।
प्राचार्य ने कहा कि भारत आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
समारोह में विद्यार्थियों ने देशभक्ति गीत और कविताएं प्रस्तुत कीं तथा स्वतंत्रता आंदोलन के महानायकों के योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान पूरा महाविद्यालय परिसर देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।
इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी, एनएसएस स्वयंसेवी और विभिन्न छात्र समितियों से जुड़े विद्यार्थी मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए देश की एकता-अखंडता बनाए रखने, संविधान के मूल्यों का सम्मान करने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लिया।




