मां मनसा देवी चरण पादुका स्थल पर रविवार को श्री अखंड परशुराम अखाड़े की ओर से सनातन एकता, धर्मरक्षा और सामाजिक जागरण को लेकर कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान अखाड़े के अध्यक्ष अधीर कौशिक ने घोषणा की कि अब श्री अखंड परशुराम अखाड़ा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज के निर्देशन में कार्य करेगा।
अधीर कौशिक ने कहा कि भगवान परशुराम अन्याय के विरुद्ध संघर्ष और संकल्प के प्रतीक हैं। अखाड़ा सनातन संस्कृति की रक्षा के साथ सामाजिक कुरीतियों और बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाता रहेगा। धर्म, समाज और राष्ट्रहित में आवश्यकता पड़ने पर अखाड़े के कार्यकर्ता श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज के मार्गदर्शन में अपनी भूमिका निभाएंगे।
श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि अखाड़ा अपने स्तर पर समाजसेवा के कार्य करता है और इसके लिए किसी से चंदा नहीं मांगता। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और सनातन परंपराओं से जोड़ना समय की आवश्यकता है। अखाड़े की ओर से बच्चों और युवाओं को निशुल्क शस्त्र एवं शास्त्र शिक्षा देकर संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शास्त्र ज्ञान देता है, जबकि शस्त्र आत्मरक्षा और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस देता है।
अखाड़े के सचिव श्रीमहंत राम रतन गिरी ने बेटियों को शस्त्र एवं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देने के अभियान की सराहना की। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बेटियों को शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का प्रशिक्षण देकर उन्हें सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना समाज की जिम्मेदारी है।
कथा व्यास पंडित पवन कृष्ण शास्त्री ने कहा कि सनातन समाज को एक सूत्र में जोड़ने और आपसी भाईचारा मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के अंत में श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने अखाड़े के सदस्यों को रुद्राक्ष की माला पहनाकर तथा ‘श्री स्कंद सुधा’ पुस्तक भेंट कर आशीर्वाद दिया।
इस अवसर पर कुलदीप शर्मा, स्वामी कार्तिक जी महाराज, श्री रुद्रानंद जी महाराज, पंडित विष्णु प्रसाद शास्त्री, आचार्य शिव नारायण शर्मा, अमित भारद्वाज, विष्णु गौड़, बृजमोहन शर्मा, संजय शास्त्री, दिनेश बाली, पंडित आदित्य जगूड़ी, उदयमणि, दीपक ओझा, पंडित विश्वास, आचार्य चूड़ामणि, मनोज ठाकुर, ऋषि शर्मा समेत अखाड़े के पदाधिकारी एवं सदस्य मौजूद रहे।




