उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वन्यजीवों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी भूरा भालू अब एशियाई काले भालू के पारंपरिक आवास वाले क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह भालुओं की हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) अवधि का कम होना और बदलती जलवायु के कारण भोजन व आवास की तलाश मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में वृद्धि और बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव से उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इसके चलते भूरे भालू अपेक्षाकृत निचले इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जहां पहले मुख्य रूप से काले भालू का वास था। इससे दोनों प्रजातियों के बीच आवास और भोजन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका है। वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस बदलाव को जैव विविधता और संरक्षण के लिए गंभीर संकेत बताते हुए भालुओं की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता जताई है उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वन्यजीवों के व्यवहार पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालयी भूरा भालू अब एशियाई काले भालू के पारंपरिक आवास वाले क्षेत्रों में भी देखा जा रहा है। इसकी प्रमुख वजह भालुओं की हाइबरनेशन (शीतनिद्रा) अवधि का कम होना और बदलती जलवायु के कारण भोजन व आवास की तलाश मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान में वृद्धि और बर्फबारी के पैटर्न में बदलाव से उच्च हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो रहा है। इसके चलते भूरे भालू अपेक्षाकृत निचले इलाकों की ओर बढ़ रहे हैं, जहां पहले मुख्य रूप से काले भालू का वास था। इससे दोनों प्रजातियों के बीच आवास और भोजन को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ने की आशंका है।
वन्यजीव विशेषज्ञों ने इस बदलाव को जैव विविधता और संरक्षण के लिए गंभीर संकेत बताते हुए भालुओं की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखने तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता जताई है।




