। उत्तराखण्ड में स्मार्ट मीटर लगाए जाने की प्रक्रिया को लेकर बढ़ते जन-असंतोष और विवादों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भेजकर योजना की स्वतंत्र तकनीकी एवं वित्तीय जांच कराने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि स्मार्ट मीटरों को लेकर प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में उपभोक्ताओं द्वारा लगातार शिकायतें और आशंकाएं व्यक्त की जा रही हैं, जिससे यूपीसीएल कर्मचारियों और आम नागरिकों के बीच विवाद की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है।
ज्ञापन में सवाल उठाया गया है कि जब पूर्व में लगाए गए डिजिटल मीटर अभी भी कार्यशील हैं तो उन्हें समय से पहले हटाकर स्मार्ट मीटर लगाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। साथ ही डिजिटल मीटरों पर हुए खर्च, उनकी शेष उपयोगी आयु, स्मार्ट मीटर योजना की कुल लागत और उसके वित्तीय भार को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा गया है।
ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि हटाए जा रहे डिजिटल मीटरों के निस्तारण, पुनः उपयोग अथवा नीलामी की प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाए तथा इससे प्राप्त धनराशि का विवरण भी जनता के समक्ष रखा जाए। इसके अलावा स्मार्ट मीटरों के कारण बढ़े हुए बिलों, तकनीकी त्रुटियों और उपभोक्ता शिकायतों की जांच के लिए स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि स्मार्ट मीटर योजना से संबंधित सभी तकनीकी और वित्तीय विवरण सार्वजनिक किए जाएं, प्रत्येक जनपद में जनसुनवाई आयोजित की जाए तथा विवादित बिलों के निस्तारण के लिए विशेष शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि उपभोक्ताओं पर किसी प्रकार का दोहरा वित्तीय भार न डाला जाए और यूपीसीएल कर्मचारियों तथा नागरिकों के बीच उत्पन्न हो रहे विवादों को रोकने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं नीतिगत कदम उठाए जाएं।
ज्ञापन में जनहित को देखते हुए स्मार्ट मीटर योजना की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।




