हरिद्वार। समाजसेवी, वरिष्ठ अधिवक्ता एवं लेखक डॉ. अरविन्द कुमार श्रीवास्तव एडवोकेट ने वर्ष 2027 में हरिद्वार में आयोजित होने वाले अर्धकुंभ मेले के प्रस्तावित बजट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर बजट व्यय में पारदर्शिता और जन निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की है।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 2027 के अर्धकुंभ मेले के लिए लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का अनुमान है। यह आयोजन केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, देश की सांस्कृतिक पहचान और जनता के टैक्स के धन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि पूर्व के कुंभ एवं अर्धकुंभ आयोजनों में समय-समय पर बजट अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और बंदरबांट के आरोप सामने आते रहे हैं। इससे जनता का विश्वास व्यवस्था पर कमजोर हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि बजट का उपयोग ईमानदारी और दूरदर्शिता के साथ किया जाए तो सड़क, सीवरेज, पेयजल, स्वच्छता, विद्युत, पार्किंग और यातायात जैसी आधारभूत सुविधाओं का स्थायी विकास संभव है, जिससे भविष्य में बार-बार भारी बजट खर्च करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
डॉ. श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि पूर्व में अस्थायी एवं दिखावटी कार्यों पर अधिक धन खर्च होने की शिकायतें सामने आती रही हैं, जबकि स्थायी निर्माण कार्य अपेक्षित स्तर पर नहीं हो पाए। उन्होंने कहा कि परिणामस्वरूप प्रत्येक कुंभ मेले में दोबारा वही कार्य कराए जाते हैं और जनता के धन का पुनः व्यय होता है।
प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने अर्धकुंभ बजट की निगरानी के लिए स्वतंत्र एवं शक्तिशाली जन निगरानी समिति गठित करने, समिति में अधिवक्ताओं, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों को शामिल करने की मांग की है। साथ ही समिति को टेंडर, भुगतान, निर्माण कार्य एवं गुणवत्ता जांच का अधिकार दिए जाने की भी बात कही गई है।
उन्होंने मांग की कि कुंभ बजट का अधिकतम हिस्सा स्थायी विकास कार्यों पर खर्च किया जाए तथा सड़क, सीवरेज, घाट, पेयजल, पार्किंग और यातायात व्यवस्था को गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित किया जाए। इसके अलावा ज्वालापुर एवं रुड़की क्षेत्र को भी अर्धकुंभ 2027 हेतु आधिकारिक कुंभ क्षेत्र घोषित करने की मांग उठाई गई है।
डॉ. श्रीवास्तव ने कहा कि समस्त बजट एवं व्यय का विवरण सार्वजनिक पोर्टल पर रियल-टाइम में उपलब्ध कराया जाए तथा किसी भी वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों एवं ठेकेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।




