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नवरात्रि अनुष्ठान के बीच दुर्गम पहाड़ों में उतरे आचार्य बालकृष्ण, किसानों के लिए तलाश रहे खेती की नई राह

नवरात्रि के नौ दिवसीय अनुष्ठान के बीच पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण उत्तराखंड के पहाड़ों में खेती की नई संभावनाएं तलाशने में जुटे हैं। पौड़ी गढ़वाल के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित मालागांव के श्री धन्वंतरि धाम हर्बल वर्ल्ड में उन्होंने दुर्गम रास्तों पर उतरकर जमीन को खेती योग्य बनाने, औषधीय एवं फलदार पौधों की संभावनाएं तलाशने और पहाड़ के किसानों के लिए आजीविका के नए विकल्प विकसित करने की पहल की है।

नुकीले पत्थरों, कंटीली झाड़ियों और मलबे से भरे रास्तों का निरीक्षण करते हुए आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि जब तक पथरीले मार्ग पर स्वयं नहीं चलेंगे, तब तक वहां सुगम रास्ता बनाने की संभावनाओं को नहीं तलाशा जा सकता। उन्होंने इस कार्य को ‘बिफोर एंड आफ्टर’ सीरीज के रूप में दर्ज करने की बात कही, ताकि काम शुरू होने से पहले और उसके बाद की स्थिति के माध्यम से जमीन को उपयोगी बनाने में आने वाली चुनौतियों और बदलावों को सामने लाया जा सके।

40 प्रजातियों की 100 से अधिक किस्मों पर प्रयोग

मालागांव स्थित हर्बल वर्ल्ड में समुद्र तल से करीब साढ़े तीन से चार हजार फीट की ऊंचाई पर विभिन्न फलदार वृक्षों और औषधीय पौधों की खेती की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, यहां करीब 40 प्रजातियों की 100 से अधिक किस्मों के पौधे लगाए गए हैं। इनमें आम, अमरूद, शहतूत, अंजीर, कटहल, आड़ू, खुबानी, चीकू और इमली जैसे फलदार वृक्षों के साथ नींबू, माल्टा, संतरा, अनार, लेमनग्रास, हल्दी और सर्पगंधा जैसे पौधे शामिल हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती और मिश्रित फसल प्रणाली यानी इंटरक्रॉपिंग की संभावनाएं भी तलाशी जा रही हैं।

इस प्रयोग का मुख्य उद्देश्य पहाड़ी जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल पौधों की पहचान करना है। इससे किसानों को अपने खेतों के लिए उपयुक्त फसलों का चयन करने और नई खेती अपनाने से पहले उसके व्यावहारिक पहलुओं को समझने में मदद मिल सकती है।

पलायन रोकने और गांवों को आबाद करने पर जोर

आचार्य बालकृष्ण ने उत्तराखंड के गांवों से हो रहे पलायन पर चिंता जताते हुए कहा कि पहाड़ों में रोजगार और आजीविका के साधन विकसित करना बेहद जरूरी है। उन्होंने बताया कि मालागांव में चल रहा मॉडल फार्मिंग का प्रयोग किसी सरकारी या कॉरपोरेट परियोजना का हिस्सा नहीं, बल्कि पहाड़ों की कृषि संभावनाओं को सामने लाने का प्रयास है।

उन्होंने कहा कि श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज ने योग और आयुर्वेद को दुनिया तक पहुंचाने के लिए पुरुषार्थ किया है। इसी तरह पहाड़ के किसानों को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के लिए भी निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। मालागांव में विकसित किए जा रहे इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में अपनाने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।

फिलहाल हर्बल वर्ल्ड में मलबा हटाने, लैंटाना की झाड़ियों की सफाई, दुर्गम रास्तों को सुगम बनाने और पौधों के संरक्षण का काम किया जा रहा है। इस पहल के जरिए पहाड़ की जमीन और स्थानीय संसाधनों का बेहतर उपयोग कर किसानों के लिए खेती के व्यावहारिक एवं टिकाऊ विकल्प विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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