हरिद्वार, 7 जून। पुरुषोत्तम माह के अवसर पर श्री राधा रसिक बिहारी भागवत परिवार सेवा ट्रस्ट के तत्वावधान में रामनगर कॉलोनी, ज्वालापुर स्थित श्री राधा रसिक बिहारी मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के सप्तम दिवस कथाव्यास भागवताचार्य पं. पवन कृष्ण शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जिसके मन में संतोष होता है, वह कभी दरिद्र नहीं होता। वास्तविक दरिद्रता धन की कमी नहीं, बल्कि असंतोष है। सुदामा जी परम संतोषी ब्राह्मण थे और विपन्न परिस्थितियों में भी सदैव भगवान का स्मरण एवं धन्यवाद करते थे। इसलिए उन्हें दरिद्र कहना उचित नहीं है।
कथाव्यास ने बताया कि गुरुकुल में साथ अध्ययन करने वाले श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता आदर्श मित्रता का प्रतीक है। द्वारिकाधीश बनने के बाद भी श्रीकृष्ण ने अपने मित्र सुदामा का अत्यंत सम्मान किया। सुदामा द्वारा भेंट किए गए चावलों को स्वीकार कर भगवान ने बिना मांगे ही उन्हें अपार वैभव प्रदान किया। उन्होंने कहा कि भगवान अपने सच्चे भक्तों पर सदैव कृपा बरसाते हैं और निष्काम भाव से भक्ति करने वालों की सभी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं।
कथा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की मनोहारी झांकियों के दर्शन किए तथा फूलों की होली का आनंद लिया। पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और उत्साह का वातावरण बना रहा।
इस अवसर पर डॉ. स्वाति गोयल, डॉ. हर्षित गोयल, प्रीति गोयल, विपिन गोयल, सोनिया गुप्ता, किशोर कुमार गुप्ता, शांति दर्गन, वीना धवन, लक्ष्मी शर्मा, इशिका शर्मा, जतिन शर्मा, पवन त्यागी, रश्मि गोस्वामी, शिमला उपाध्याय, किरण शर्मा, भारत भूषण शर्मा, विनोद ठाकुर, राहुल ठाकुर, महेंद्र शर्मा, वंदना गुप्ता सहित अनेक श्रद्धालुओं ने भागवत पूजन एवं कथा श्रवण में सहभागिता की।




