आदि शंकराचार्य भगवान के प्रकट्योत्सव के अवसर पर मंगलवार को ज्योतिर्मठ में भव्य धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर उत्तराम्नाय ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने प्रातःकाल उस पवित्र गुफा में पूजा-अर्चना की, जहां लगभग 2500 वर्ष पूर्व आदि शंकराचार्य ने ‘प्रस्थानत्रयी’ ग्रंथों पर भाष्य की रचना की थी।
पूजन के दौरान गुरुपादुका स्तोत्र का पाठ किया गया। इसके पश्चात नृसिंह मठांगण स्थित मूल ज्योतिर्मठ में विराजमान देवविग्रहों के दर्शन-पूजन कर आदि शंकराचार्य के अष्टोत्तर शतनाम से अर्चन एवं आरती संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने कल्पवृक्ष, ज्योतिरीश्वर तथा माता पूर्णागिरि देवी के भी दर्शन किए।
कार्यक्रम के अंतर्गत लक्ष्मी-नृसिंह भगवान के पूजन के बाद आदि शंकराचार्य की पालकी पर पुष्पार्पण किया गया। पूजन के उपरांत पालकी यात्रा पांडुकेश्वर के लिए रवाना हुई, जो बुधवार को बदरीनाथ धाम पहुंचेगी। आगामी वैशाख शुक्ल सप्तमी को प्रातः शुभ मुहूर्त में भगवान बदरीविशाल के कपाट खोले जाएंगे।
इस अवसर पर अनेक संत-महात्मा, वेदपाठी एवं स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे।




