हरियाणा के समालखा में आयोजित 79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम आध्यात्मिक जागृति, प्रेम, भक्ति और सद्भाव के संदेश के साथ संपन्न हो गया। समापन दिवस पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने लाखों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रह्मज्ञान की वास्तविक सार्थकता उसे जीवन में अपनाने और अपने विचारों, व्यवहार एवं कर्मों में शामिल करने में है।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि आध्यात्मिक जागृति केवल सत्संग या संत समागम तक सीमित नहीं है, बल्कि निराकार परमात्मा के अहसास के साथ जीवन के हर पल को जीने का नाम है। सच्ची जागृति तभी आती है, जब ब्रह्मज्ञान की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं को सकारात्मक सोच, प्रेम, करुणा और विनम्रता अपनाने की प्रेरणा दी। साथ ही दूसरों की कमियों के बजाय उनकी खूबियों को देखने और अपने घर-परिवार से ही आध्यात्मिक बदलाव की शुरुआत करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि सेवा, सुमिरन और सत्संग को जीवन का अभिन्न अंग बनाकर प्रत्येक परिस्थिति में परमात्मा का अहसास बनाए रखना चाहिए। इससे जीवन सुखमय बनने के साथ आध्यात्मिक रूप से भी समृद्ध होता है। समागम में शामिल श्रद्धालु सतगुरु के संदेशों से प्रेरणा लेकर अपने-अपने गंतव्यों की ओर रवाना हुए।
80 कवियों ने ‘जागृति’ विषय पर प्रस्तुत कीं स्वरचित कविताएं
समागम के चारों दिन आयोजित कवि दरबार भी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। इसमें बाल कवियों सहित महिला और पुरुष कवियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुल 80 कवियों ने ‘जागृति’ विषय पर हिंदी, राजस्थानी, पंजाबी, अंग्रेजी, हरियाणवी, मुल्तानी, मराठी, भोजपुरी और संस्कृत सहित विभिन्न भाषाओं में अपनी स्वरचित कविताएं प्रस्तुत कीं। भावपूर्ण काव्य प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
संत निरंकारी मंडल ने जताया आभार
इस अवसर पर संत निरंकारी मंडल के सचिव जोगिंदर सुखीजा ने सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता जी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने समागम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सरकारी विभागों, साध-संगत और अन्य सहयोगियों का आभार जताया। उन्होंने इस वर्ष पिछले वर्षों की अपेक्षा अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए भविष्य में भी संगत की संख्या में वृद्धि की कामना की।
79वां वार्षिक निरंकारी संत समागम आध्यात्मिक जागृति, आपसी सद्भाव और मानवता के संदेश को मजबूत करने वाला आयोजन बना। समागम ने अनेकता में एकता और संपूर्ण मानव समाज को प्रेम के सूत्र में बांधने की प्रेरणा दी।




