182-सरेनी विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में जनसंपर्क के दौरान लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीतों की जीवंत झलक देखने को मिली। बैसवारे की लोक परंपरा में विशेष महत्व रखने वाले ‘गउनई’ लोकगीतों की गूंज के बीच महिलाओं ने मांगलिक एवं शुभ अवसरों से जुड़े पारंपरिक गीत प्रस्तुत किए। इस दौरान गीतिका द्विवेदी ने महिलाओं के बीच बैठकर लोकगीतों का आनंद लिया और उनसे आत्मीय संवाद किया।
जनसंपर्क के दौरान गीतिका द्विवेदी ने अपनी मां एवं समाजसेविका सुधा द्विवेदी के लिए भी ग्रामीणों से संवाद किया। महिलाओं ने सुधा द्विवेदी के सहज व्यवहार, लोगों के बीच उनकी मौजूदगी और सामाजिक सरोकारों को लेकर अपनी बातें साझा कीं।
गीतिका द्विवेदी ने कहा कि गांव की मिट्टी में रची-बसी लोक संस्कृति क्षेत्र की पहचान है। पारंपरिक लोकगीतों के बीच महिलाओं के साथ समय बिताना अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने का अनुभव है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों से मिल रहा स्नेह और सहयोग समाज के प्रति जिम्मेदारी को और मजबूत करता है।
लोक संस्कृति बनी जनसंवाद का माध्यम
इस दौरान महिलाओं ने गांव की स्थानीय समस्याओं, क्षेत्र की आवश्यकताओं और भविष्य की अपेक्षाओं पर भी चर्चा की। गीतिका द्विवेदी ने कहा कि जनसंपर्क का उद्देश्य केवल लोगों से मिलना नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं को सुनना और समझना भी है। उन्होंने ग्रामीण महिलाओं और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि उनका प्यार और सहयोग समाज के लिए बेहतर कार्य करने की प्रेरणा देता है।




