श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने संत समाज को पत्र लिखकर सनातन धर्म और संस्कृति के संरक्षण के लिए भविष्य की रणनीति पर विचार करने का अनुरोध किया है। पत्र में उन्होंने सनातन वैदिक राष्ट्र के निर्माण की आवश्यकता बताते हुए संतों से इस विषय पर अपने सुझाव शीघ्र देने की अपील की है।
महामंडलेश्वर ने पत्र में जनसंख्या और भविष्य की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर अपनी आशंकाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने भारत में धार्मिक जनसांख्यिकी में बदलाव की स्थिति में सनातन धर्म और संस्कृति के सामने संकट उत्पन्न होने की बात कही। पत्र में इस्लाम के इतिहास और भविष्य को लेकर कई गंभीर आरोप एवं आशंकाएं भी व्यक्त की गई हैं।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की रक्षा के लिए धर्मगुरुओं को समाज को संगठित करने और भविष्य की चुनौतियों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। पत्र में उन्होंने राष्ट्र को धर्म और संस्कृति के संरक्षण का आधार बताते हुए सनातन वैदिक संस्कृति के अनुरूप एक अलग राष्ट्र की मांग रखी है।
यति नरसिंहानंद ने संतों से इस मुद्दे पर अपने विचार और सुझाव पत्र के माध्यम से उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है, ताकि आगे की रणनीति पर विचार किया जा सके। उन्होंने कहा कि उनका पत्र किसी व्यक्तिगत आकांक्षा से प्रेरित नहीं, बल्कि सनातन धर्म और समाज के भविष्य को लेकर उनकी चिंता का परिणाम है।
हालांकि, पत्र में धार्मिक समुदायों के बारे में कई बेहद तीखे और विवादित दावे भी किए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पत्र में उपलब्ध नहीं है। पत्र के अंत में महामंडलेश्वर ने संतों से सनातन धर्म और धर्मावलंबियों के संरक्षण के प्रयासों में आगे आने का आह्वान किया है।




