उत्तराखंड सरकार ने मान्यता के बिना संचालित हो रहे मदरसों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। समाज कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा है कि निर्धारित मानकों को पूरा कर मान्यता लेना जरूरी है। मान्यता से इनकार करने वाले मदरसों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मंत्री ने बताया कि धामी सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का गठन किया है। अब प्रदेश में संचालित मदरसों को राज्य शिक्षा बोर्ड के माध्यम से निर्धारित पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए प्राधिकरण से मान्यता लेनी होगी। सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना है।
खजान दास के अनुसार प्रदेश में कुल 452 मदरसे हैं, जिनमें से 200 से अधिक ने अभी तक मान्यता नहीं ली है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार धार्मिक शिक्षा के खिलाफ नहीं है, लेकिन सभी संस्थानों को निर्धारित व्यवस्था और नियमों के दायरे में रहकर संचालन करना होगा।
उन्होंने कहा कि मदरसों की जांच पहले भी होती रही है और सरकार इस मामले को चुनावी मुद्दे के रूप में नहीं देख रही है। इसी बीच प्रदेश में मान्यता और निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करने वाले मदरसों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी शुरू हो गई है। रुद्रपुर में दो मदरसों को सील किए जाने के बाद प्रदेशभर में निरीक्षण और कार्रवाई की तैयारी है।
मंत्री ने बातचीत में समाज कल्याण विभाग की अन्य योजनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि विधवा पेंशन में वृद्धि के साथ इसका नाम बदलकर ‘एकल नारी सम्मान’ किए जाने की योजना है।




