पतंजलि विश्वविद्यालय एवं पतंजलि अनुसंधान संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक माह के ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रम-2026 का शनिवार को भव्य समापन हुआ। देश के 11 राज्यों से आए 130 छात्र-छात्राओं ने आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, भारतीय ज्ञान परंपरा और व्यक्तित्व विकास का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
समापन समारोह में कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि चरित्रवान, शोधपरक और राष्ट्र निर्माण के लिए समर्पित युवा तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति, योग और यज्ञ के साथ आधुनिक विज्ञान का समन्वय विद्यार्थियों को संतुलित व्यक्तित्व प्रदान करता है।
मुख्य अतिथि एवं प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप है। पतंजलि विश्वविद्यालय ने शिक्षा को पुस्तकों तक सीमित न रखकर उसे जीवन, अनुसंधान, भारतीय ज्ञान प्रणाली और नैतिक मूल्यों से जोड़ने का सराहनीय कार्य किया है।
एक माह तक चले प्रशिक्षण में प्रतिभागियों को सूक्ष्मजीव विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, जैव सूचना विज्ञान, औषधीय पादप, आणविक जीवविज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर प्रयोगशाला आधारित प्रशिक्षण दिया गया। प्रत्येक दिन की शुरुआत वैदिक यज्ञ और योगाभ्यास से होती थी।
समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। साथ ही शैक्षणिक प्रदर्शन, प्रयोगशाला कार्य, अनुशासन तथा योग-यज्ञ में उत्कृष्ट सहभागिता के आधार पर पांच प्रतिभागियों—चंद्रिका गोयल, मेघना गुप्ता, बादल पंचाल, अर्वीतिका त्यागी और अनन्या उनियाल—को हवन किट प्रदान कर सम्मानित किया गया।
प्रतिभागियों ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें वैज्ञानिक सोच के साथ अनुशासित और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का समापन राष्ट्र की वैज्ञानिक प्रगति और मानव कल्याण की मंगलकामनाओं के साथ हुआ।




