हरिद्वार, 17 मार्च। श्री भगवानदास आदर्श संस्कृत महाविद्यालय में तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव का समापन मंगलवार को भव्य कार्यक्रम के साथ हुआ। समापन अवसर पर अखिल भारतीय संस्कृत शोध सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसका विषय “श्री शंकराचार्य की शास्त्रीय दृष्टि और भारतीय संस्कृति पर उनका प्रभाव” रहा। इसमें देशभर से आए विद्वानों एवं शोधार्थियों ने सहभागिता की।
सम्मेलन की अध्यक्षता पूर्व प्राचार्य डॉ. भोला झा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी परानंद महाराज (धर्म संघ, दिल्ली) उपस्थित रहे। मुख्य वक्ता प्रो. रामप्रकाश वर्णी ने कहा कि सनातन धर्म के पुनरुत्थान का श्रेय जगद्गुरु आदि शंकराचार्य को जाता है। पतंजलि विश्वविद्यालय के डॉ. गौतम आर. ने भारतीय इतिहास के सही प्रस्तुतीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। सम्मेलन का संचालन एम. नरेश भट्ट ने किया, जबकि संयोजन डॉ. आशिमा श्रवण ने किया।
समापन सत्र की अध्यक्षता समाजसेवी देशराज शर्मा ने की। इस दौरान आयोजित विभिन्न खेल एवं सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। क्रिकेट प्रतियोगिता में मेजबान महाविद्यालय की टीम विजेता रही, जबकि गुरुकुल महाविद्यालय ज्वालापुर उपविजेता रहा। बैडमिंटन में दीपांशु जोशी प्रथम और लक्की जोशी द्वितीय रहे। संस्कृत भाषण प्रतियोगिता में मोहित चंदर सती ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
योगासन, दौड़ सहित अन्य प्रतियोगिताओं में भी प्रतिभागियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में नगर विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने महाविद्यालय की गतिविधियों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था द्वारा संचालित योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं संस्कृत अध्ययन केंद्र समाज के लिए उपयोगी हैं।
विशिष्ट अतिथि संस्कृत भारती के प्रांत संगठन मंत्री गौरव शास्त्री ने छात्रों को आशीर्वाद दिया। अंत में प्रभारी प्राचार्य डॉ. रवीन्द्र कुमार ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




