सरकारी संपत्तियों की मोनेटाइज़ेशन से बुनियादी ढांचे को मिलेगी नई गति; राज्य सरकारों को योजनाएँ बनाने का आह्वान।
नई दिल्ली — सेबी (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि रेलवे, सड़क, हवाईअड्डा और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सरकार के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों का तेज़ मुद्रीकरण (monetization) पूंजी जुटाने का एक महत्वपूर्ण जरिया हो सकता है।
क्या कहा पांडे ने
उन्होंने बताया कि इन क्षेत्रों में सरकारी संपत्तियों को मोनेटाइज करने से निवेशकों का ध्यान उन परियोजनाओं की ओर आकर्षित होगा जहाँ निवेश की ज़रूरत अधिक है।
पांडे ने यह भी कहा कि सरकार की संपत्ति मोनेटाइजेशन योजना ने पहले Infrastructure Investment Trusts (InvITs) की मदद से बुनियादी ढांचे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राज्य सरकारों की भूमिका
पांडे ने माना कि अधिकांश राज्य सरकारों ने अभी तक परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण की योजनाएँ तैयार नहीं की हैं, जो कि एक कमी है।
यदि यह कसर पूरी हो जाए, तो बुनियादी ढांचे के निर्माण में गति आएगी और नए संसाधन खुलेंगे।
वित्तीय उपकरण और विकल्प
पूंजी के स्रोत बढ़ाने के लिए, SEBI प्रमुख ने InvITs, REITs, Public-Private Partnerships (PPP) और सिक्योरिटाइजेशन जैसे विकल्पों पर ज़ोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ़ सरकार या बैंक पर निर्भर रहने से जोखिम (concentration risk) बढ़ता है। पूंजी बाजार अन्य उपकरणों से बेहतर विविधता ला सकता है।
वर्तमान स्थिति
उन्होंने उदाहरण दिया कि 2017 से अब तक नगर निकाय बांड्स (municipal bonds) के ज़रिए 21 निर्गमों से लगभग ₹3,134 करोड़ जुटाए गए हैं। लेकिन निवेशक आधार को और विस्तारित करने की ज़रूरत है।
गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और Infrastructure Debt Funds का योगदान बढ़ रहा है, क्योंकि बैंकों की इंफ्रा लोनिंग में रुचि कम हो रही है।
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विश्लेषण
लाभ: मोनेटाइजेशन से सरकारी बजट पर दबाव कम होगा, निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और सार्वजनिक सेवाओं एवं बुनियादी ढाँचे की गुणवत्ता तेज़ी से सुधरेगी।
चुनौतियाँ: सही मूल्यांकन, पारदर्शिता, राजस्व के पूर्वानुमान तथा निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक होगा।
राजनीतिक / नीति-दृष्टिकोण: राज्य-सरकारों और केंद्र सरकार को मिलकर काम करना होगा ताकि स्थानीय सरकारों की भागीदारी बढ़े और मुद्रीकरण से होने वाले राजस्व का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचे।




