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ग्लेशियर झीलों की अब हाईटेक निगरानी, सभी विभाग 24 घंटे अलर्ट मोड पर

प्रदेश में लगातार हो रही बारिश और हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर झीलों से उत्पन्न संभावित खतरे को देखते हुए राज्य सरकार ने आपदा प्रबंधन तंत्र को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए हैं। आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने अधिकारियों को सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाते हुए किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए अब अत्याधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा। झीलों के जलस्तर, आकार, जलभराव और उनमें होने वाले संभावित बदलावों पर लगातार नजर रखने के लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी जैसी तकनीकों के उपयोग की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसी भी असामान्य बदलाव का समय रहते पता लगाकर संभावित खतरे को टालना है।

बैठक में प्रदेश में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों, राहत-बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति और संचार व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को संवेदनशील और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखने तथा बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने के निर्देश दिए गए।

सरकार की ओर से संवेदनशील ग्लेशियर झीलों का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और नियमित निगरानी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार राज्य में 13 ग्लेशियर झीलों को संवेदनशील श्रेणी में चिह्नित किया गया है, जिनमें से चार का सर्वेक्षण किया जा चुका है। शेष झीलों का भी चरणबद्ध तरीके से वैज्ञानिक अध्ययन कराया जाएगा।

इसके साथ ही संभावित प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सुरक्षित निकासी मार्ग, चेतावनी तंत्र और राहत-बचाव संसाधनों को मजबूत करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में प्रशासन और स्थानीय तंत्र तत्काल सक्रिय हो सके।

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