उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड समाप्त कर राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण लागू किए जाने के सरकार के फैसले का जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने विरोध किया है। संगठन ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के शैक्षिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार से नए कानून की समीक्षा करने की मांग की है।
जमीयत के पदाधिकारियों ने कहा कि मदरसा बोर्ड वर्षों से राज्य के मदरसों के संचालन और मान्यता की व्यवस्था संभालता रहा है। उनका कहना है कि नए प्राधिकरण के गठन से पहले संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद किया जाना चाहिए था। संगठन ने कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो सरकार को ज्ञापन देकर अपने सुझाव और आपत्तियां भी प्रस्तुत की जाएंगी।
जमीयत ने सरकार से अपील की कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण कानून की समीक्षा कर मदरसों के हितों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। वहीं सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए समान और आधुनिक शिक्षा प्रणाली लागू करने के उद्देश्य से बनाई गई है।




