आदिगुरु आदि शंकराचार्य भगवान का 2533वां प्राकट्य महोत्सव लखनौर (झंझारपुर), जिला मधुबनी के राधा-कृष्ण मंदिर प्रांगण में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम ब्राह्मण भूषण अधिवक्ता श्री प्रेमचंद्र झा के सानिध्य में आयोजित हुआ, जो जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन पीठाधीश्वर के कृपापात्र शिष्य हैं। मंदिर की स्थापना मिथिला के संत लक्ष्मीनाथ गोसाईं जी महाराज द्वारा की गई थी।
इस अवसर पर श्री प्रेमचंद्र झा ने अपने संबोधन में कहा कि आदि शंकराचार्य ने धर्म की रक्षा और मानव उत्थान के लिए अवतार लिया। उन्होंने बिना किसी हिंसा के केवल शास्त्रार्थ के माध्यम से सनातन धर्म का पुनरुद्धार किया और 32 वर्ष की अल्पायु में चारों धाम की व्यवस्था को सुदृढ़ किया। उन्होंने दशनामी संन्यासी परंपरा की स्थापना कर देश में आध्यात्मिक एकता को मजबूत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आचार्य काशीनाथ किरण ने की। वृंदावन से पधारे भागवत कथा मर्मज्ञ जय नाथ महाराज ने वर्तमान पुरी पीठ के शंकराचार्य द्वारा सनातन धर्म की रक्षा हेतु चलाए जा रहे अभियानों और उनके सादगीपूर्ण जीवन पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर अनूप कुमार झा, प्रो. शंकर झा, डॉ. कृष्ण मुरारी झा, लेखक आनंद कुमार झा, अभिनव कुमार झा एवं विक्रम झा सहित कई विद्वानों और गणमान्य लोगों ने अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं बीके बाबा वैदेही के स्वागत गान से हुआ। संचालन एवं प्रायोजन सिमर फिल्म इंटरनेशनल के अध्यक्ष सुमित सुमन ने किया। संयोजक सुनील कुमार झा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सभी के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में संजय झा, विपिन झा, हिमकर कुंडिल्य, गोपाल झा, जयशंकर मिश्रा, अमर चौधरी सहित अनेक क्षेत्रवासियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
हर-हर महादेव।




