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दया और करुणा की तरह प्रतिशोध भी सनातन धर्म का मुख्य अंग – यति नरसिंहानंद गिरी

श्यामा श्याम मंदिर, गांधीनगर मुजफ्फरनगर में चल रहे पांच दिवसीय मां बगलामुखी महायज्ञ के दूसरे दिन प्रवचन करते हुए शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर व जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार दया और करुणा सनातन धर्म के मूल अंग हैं, उसी प्रकार धर्म, राष्ट्र और परिवार की रक्षा तथा शत्रुओं से प्रतिशोध लेना भी सनातन धर्म का प्रमुख लक्षण है।

 

उन्होंने श्रीराम, श्रीकृष्ण, भगवान परशुराम और बजरंगबली के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि इन महापुरुषों ने अपने परिवार के सम्मान और धर्म की रक्षा हेतु युद्ध कर शत्रुओं का संहार किया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति धर्म और परिवार की रक्षा तथा प्रतिशोध नहीं करता, वह सनातन धर्म का सच्चा अनुयायी नहीं हो सकता।

 

महायज्ञ में मुख्य यजमान संजय धीमान रहे, जबकि आयोजन में प्रमुख भूमिका राजू सैनी ने निभाई। आज के यजमान अरुण सैनी व उनकी धर्मपत्नी नीतू सैनी रहे। महायज्ञ के पुरोहित पंडित सनोज शास्त्री हैं।

 

इस अवसर पर यति अभयानंद जी, यति धर्मानंद जी, मोहित बजरंगी, डॉ. योगेंद्र योगी, पंडित सुनील दत्त शर्मा सहित नीटू त्यागी, संदीप जिंदल, सुनील त्यागी, विनोद पाल, ईश पाल, संजय पाल सैनी, गौरव, सौरभ आदि अनेक भक्तगणों ने आहुति समर्पित की।

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