जुर्स कंट्री ज्वालापुर टाउनशिप के सैकड़ों निवासियों की लंबी कानूनी लड़ाई को बड़ी सफलता मिली है। उत्तराखंड रेरा (UKRERA) देहरादून कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए बिल्डर The Vardhman Developers द्वारा सामुदायिक क्षेत्र—स्टिल्ट एरिया और ओपन स्पेस—को अवैध रूप से कार पार्किंग के रूप में बेचने की कार्रवाई को अवैध ठहराया है। यह निर्णय शनिवार को हरिद्वार प्रेस क्लब में सार्वजनिक किया गया।
बिल्डर की अवैध पार्किंग बिक्री पर रोक:
रेरा कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि सामुदायिक क्षेत्र को निजी पार्किंग के रूप में बेचना नियमों के विरुद्ध है।
30 दिन में वैध पार्किंग आवंटन:
बिल्डर को निर्देश दिया गया है कि 30 दिनों के भीतर सभी पात्र खरीदारों को उचित व पारदर्शी तरीके से पार्किंग नंबर सहित आवंटन पत्र जारी किए जाएं।
45 दिनों में पूरी राशि वापस:
अवैध रूप से वसूला गया पार्किंग शुल्क तथा उस पर लगा GST/Service Tax खरीदारों को 10.85% वार्षिक ब्याज सहित लौटाना अनिवार्य होगा। देरी होने पर अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा।
निवासियों की एकजुटता बनी सफलता की कुंजी
यह मामला वर्ष 2021 से UKRERA में लंबित था Jurs Country Residents Welfare Association ने संगठित रूप से आगे बढ़ाया।एसोसिएशन के प्रमुख पदाधिकारियों—अध्यक्ष राजीव राय,उपाध्यक्ष अरविंद सिंह,महासचिव जितेंद्र कुमार शर्मा,सचिव शुभाशीष देवनाथ,कोषाध्यक्ष थिरेंद्र जौहरी,जनसंपर्क अधिकारी अजय दुर्ग—ने लगातार पैरवी कर निवासियों के अधिकारों की लड़ाई को मुकाम तक पहुँचाया। सभी निवासियों की एकजुटता और सहयोग इस न्यायिक जीत की सबसे बड़ी ताकत रही।
“सच की जीत”—निवासियों की प्रतिक्रिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में निवासियों ने इस फैसले को “जनता की विजय” बताया। उनका कहना था कि यह आदेश केवल जुर्स कंट्री सोसाइटी का नहीं, बल्कि उन सभी खरीदारों के अधिकारों की जीत है जो बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाते हैं।
रियल एस्टेट सेक्टर के लिए मिसाल RERA का यह निर्णय भविष्य में अन्य बिल्डरों पर भी नकेल कसेगा और रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला खरीदारों के अधिकारों को मजबूत करता है और उन्हें न्याय दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगा।




