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कृषि में एआई: किसानों की आजीविका सुधारने की नई पहल

“एआई से खेती का कायापलट — 13 राज्यों में मॉनसून-पूर्वानुमान, कीट पहचान और ‘किसान ई-मित्र’ से किसानों को बड़ी

सरकार ने 2025-26 मौसम और कृषि सत्र के लिए बड़े पैमाने पर एआई आधारित टेक्नोलॉजी अपनाई है, ताकि खेती से जुड़ी चुनौतियों को कम किया जा सके और किसानों की आमदनी बढ़े।

यह कदम उस समय उठाया गया है, जब बदलते मौसम, कीट-रोग और बदलती ज़मीन की चुनौतियाँ किसानों के सामने रोज़मर्रा की समस्या बन रही हैं।

मुख्य पहलें (AI-टूल्स):

Kisan e-Mitra — एक वॉयस-बेस्ड एआई चैटबोट, जो किसानों को उनकी योजनाओं जैसे PM Kisan Samman Nidhi, PM Fasal Bima Yojna, या Kisan Credit Card आदि से जुड़ी जानकारी देता है। यह अब तक रोज़ाना लगभग 8,000 सवालों का जवाब दे रहा है, और कुल मिलाकर 93 लाख से ज़्यादा किसानों को सहायता दे चुका है।

National Pest Surveillance System (NPSS) — मशीन-लर्निंग आधारित प्रणाली, जिसमें किसान फसलों में कीट या रोग देख कर उसकी फोटो अपलोड कर सकते हैं। यह 66 फसलों और 432+ कीट/रोग की पहचान कर सकता है। इससे समय पर कीट-नियंत्रण संभव होता है।

AI-आधारित मॉनसून पूर्वानुमान — देश के 13 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट, जिसके तहत मौसम, ऐतिहासिक डेटा और आधुनिक AI Forecasting सिस्टम जैसे NeuralGCM और AIFS का इस्तेमाल हो रहा है। इससे किसानों को सही समय पर बुवाई, सिंचाई और अन्य फैसलों में मदद मिलेगी।

सूचना और सलाह तुरंत — खेत की स्थिति, मौसम, मिट्टी, फसल-स्वास्थ्य आदि डेटा को सैटेलाइट इमेजिंग व AI एनालिटिक्स से जोड़कर किसान-विशेषज्ञों को तत्काल जानकारी मिल सकती है।

पहले ही सर्वे में बिहार व मध्य प्रदेश के कई किसानों ने बताया कि AI-पूर्वानुमान के आधार पर उन्होंने अपनी बुवाई या फसल समय बदल दी — करीब 31–52% किसानों ने अपनी खेती की रणनीति बदलने का फैसला किया।

इससे फसल की पैदावार, खेती की लागत, कीट/रोग नियंत्रण, और मौसम-अनुकूल खेती जैसी चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी — जिससे किसानों की आमदनी और आजीविका बेहतर हो सकती है।

एआई से खेती का नया युग — 13 राज्यों में मॉनसून-पूर्वानुमान, कीट पहचान और ‘किसान ई-मित्र’

नई दिल्ली — 6 दिसंबर 2025: बदलते मौसम, कीट-रोग और खेती की बढ़ती चुनौतियों के बीच, सरकार ने खेती को ‘डिजिटल’ और ‘स्मार्ट’ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इस वर्ष खरीफ 2025 के लिए 13 राज्यों में एआई आधारित मॉनसून-पूर्वानुमान लागू किया गया है, जिससे 3.88 करोड़ से ज्यादा किसानों को उनकी भाषा में SMS-आधारित मौसम सूचना मिली। इस सूचना के आधार पर हजारों किसानों ने अपनी बुवाई, सिंचाई और फसल योजना बदल कर समय से पहले तैयारी शुरू कर दी।

साथ ही, ‘किसान ई-मित्र’ वॉयस-चैटबोट किसानों का नया डिजिटल साथी बन गया है — अब तक 93 लाख से अधिक किसानों की पीएम-किसान, फसल बीमा, क्रेडिट कार्ड आदि से जुड़ी शंकाओं का समाधान चुका है।

खेती के लिए सबसे बड़ी समस्या — कीट, रोग और फसल नुकसान — को देखते हुए, नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम ने 66 फसलों और 432 से अधिक कीट/रोगों की पहचान के लिए AI-सक्षम प्लेटफार्म तैयार किया है। किसान खेत की फोटो भेजकर तुरंत निदान पा सकते हैं और समय रहते कीट नियंत्रण कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम खेती में ‘भविष्य-साक्षी’ परिवर्तन की ओर पहला कदम है। यदि यह सफल रहा, तो आने वाले वर्षों में किसान न सिर्फ बेहतर उपज पाएंगे, बल्कि खेती कृषि-रोज़गार को भी अधिक स्थिर, लाभदायक और टिकाऊ बना देगा।

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