संत समाज के सम्मान की रक्षा की मांग को लेकर मंगलवार को हरिद्वार के सर्वानंद घाट से देहरादून स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय तक यति शिष्यों की पदयात्रा प्रारंभ हुई। पदयात्रा का नेतृत्व दहियाकी शिव मंदिर के महंत यति रामस्वरुपानन्द गिरी ने किया।
महंत यति रामस्वरुपानन्द गिरी, जो श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा से संबद्ध हैं, ने बताया कि यह पदयात्रा उनके गुरु भाई यति परमात्मानन्द गिरी के साथ कथित दुर्व्यवहार के विरोध में निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि संन्यासियों के सम्मान और गरिमा की रक्षा के लिए संत समाज सड़क पर उतरने को बाध्य हुआ है।
यति परमात्मानन्द गिरी ने आरोप लगाया कि 5 फरवरी 2026 की रात्रि को कोटद्वार थाना पुलिस द्वारा पूछताछ के लिए ले जाने के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया, जिससे उनकी धार्मिक और सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
श्री महंत यति रणसिंहानन्द गिरी एवं योगी सरोजनाथ जी महाराज ने भी घटना की पारदर्शी जांच कराने की आवश्यकता पर बल दिया। पदयात्रा का उद्देश्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मिलकर संत समाज की पीड़ा और मांगों को अवगत कराना बताया गया है।
पदयात्रा में सतीश शर्मा (गौरक्षा जिला प्रमुख, रुड़की), योगेंद्र सालार (जिला उपाध्यक्ष, भारतीय हिंदू रक्षा वाहिनी), चौधरी अनुज बेनिवाल, प्रदीप धीमान, चौधरी ईसम सिंह (सेवानिवृत्त कैप्टन, आर्मी) सहित बड़ी संख्या में साधु-संत और समर्थक शामिल रहे।
यति शिष्यों ने चेतावनी दी कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।




