केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कर्नाटक सरकार द्वारा स्थानीय निकाय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) की जगह बैलेट पेपर (कागज़ मतपत्र) के इस्तेमाल के निर्णय को *“एंटी-टेक्नोलॉजी” और ”पिछड़ा कदम” बताया है। जोशी ने कहा कि यह फैसला विश्वसनीयता के बजाय शक पर आधारित है और तकनीकी प्रगति के खिलाफ एक संकेत देता है।
कर्नाटक कैबिनेट ने हाल ही में पंचायती और नगरीय निकाय चुनावों के लिए बैलेट पेपर वापसी का प्रस्ताव मंज़ूर किया था, जिसके तहत आगामी ग्राम-पंचायत, ज़िला और तालुका स्तर के चुनाव इलेक्ट्रॉनिक मशीनों की बजाय कागज़ मतपत्रों से होंगे। कैबिनेट के इस निर्णय को सरकारी राजनैतिक गलियारों में लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास बढ़ाने की कोशिश बताया गया है।
जोशी ने सोशल मीडिया पोस्ट और सार्वजनिक बयान में कहा कि EVM ने बूथ कैप्चरिंग जैसी पुरानी समस्याओं को रोकने में मदद की है और जनता का मतदाता विश्वास भी इन मशीनों में बना रहा है, जैसा कि राज्य के अपने विभागीय सर्वेक्षण दिखाते हैं। उन्होंने कर्नाटक सरकार के फैसले को भूत-काल की ओर वापसी के रूप में वर्णित किया है।
विश्लेषकों के अनुसार, बैलेट पेपर की वापसी का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है, क्योंकि विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ के लिए किया गया निर्णय बताते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के बीच आलोचनात्मक टिप्पणियाँ बढ़ रही हैं।
• बैलेट पेपर वापसी: राज्य कैबिनेट ने पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों के लिए EVM की बजाय कागज़ मतपत्र लागू करने का फैसला किया।
• प्रल्हाद जोशी की प्रतिक्रिया: केंद्रीय मंत्री ने इसे तकनीक-विरोधी और पिछड़ा कदम बताया, EVM के अनुभव पर सवाल उठाए।
• राजनीतिक सरगर्मी: यह विषय दोनों दलों के बीच मतदाता विश्वास, चुनावी विश्वास और तकनीकी प्रगति पर बहस का कारण बन रहा है।




