प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ कथित अपमानजनक व्यवहार को लेकर तीव्र विवाद खड़ा हो गया है। चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत सहित धार्मिक संगठनों ने घटना की कड़ी निंदा की है और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
घटना उस समय सामने आई जब मौनी अमावस्या के दिन अविमुक्तेश्वरानंद और उनके अनुयायियों को संगम तट पर पारंपरिक स्नान समारोह में भाग लेने से रोका गया। इस दौरान प्रशासन द्वारा उनके साथ किए गए कथित व्यवहार को धार्मिक नेताओं ने सनातन धर्म और धार्मिक आस्था का अपमान बताया है।
मुख्य Developments:
• चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कहा कि पुलिस व प्रशासन का व्यवहार अशोभनीय और निंदनीय था, जो उच्च धर्माचार्य के साथ नहीं होना चाहिए। उन्होंने मामले की उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग की है।
• उत्तराखंड सहित अन्य स्थानों पर समर्थक संगठनों ने हवन, यज्ञ और कीर्तन कार्यक्रमों के माध्यम से विरोध जताया और प्रशासन से माफी की भी मांग की।
• विवाद का प्रशासनिक पक्ष भी सामने आया है, जिसमें प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा है कि वे अपने आप को ‘शंकराचार्य’ कैसे घोषित कर रहे हैं, क्योंकि इस पद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला है। प्रशासन ने 24 घंटे में जवाब देने को कहा है।
धार्मिक और सामाजिक समुदायों में यह मुद्दा व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसमें संत समाज, पुरोहित मंडल तथा विभिन्न धार्मिक संगठनों ने प्रशासनिक रवैये पर अपनी प्रतिक्रिया जताई है। शांतिपूर्वक समाधान और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की मांग जारी है।




