नई दिल्ली (संवाद) — सरकार ने सोमवार को संसद में बयान देते हुए कहा कि देश में पिछले पाँच वर्षों के दौरान कुल 2,04,268 निजी कंपनियाँ बंद हो गयी हैं।
सरकार के अनुसार, 2022-23 वित्तीय वर्ष सबसे अधिक कंपनियाँ बंद होने का साल रहा — इस वर्ष अकेले 83,452 कंपनियाँ बंद हुर्ईं। वहीं 2021-22 में 64,054, 2023-24 में 21,181 और 2024-25 में अब तक 20,365 कंपनियाँ बंद हुर्ईं।
बंद होने का कारण सिर्फ घाटा नहीं है — इनमें कई कंपनियाँ मर्जर, व्यावसायिक संरचना में बदलाव, या अज्ञ्रियापित (निष्क्रिय) होने के कारण रिकार्ड से हटा दी गयी हैं।
जब सांसदों ने पूछा कि इन बंद हुई कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों के पुनर्वास या पुन: नियुक्ति का सरकार कोई प्रस्ताव लेकर आगे बढ़ रही है या नहीं, तो सरकार ने जवाब दिया कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह आंकड़ा न सिर्फ आर्थिक मोर्चे पर बल्कि रोजगार-संकट और कॉरपोरेट जगत की अनिश्चितता की ओर भी संकेत देता है।




