देहरादून, 28 नवंबर 2025। उत्तराखंड में Chief Electoral Officer, Uttarakhand (CEO-UK) द्वारा 2003 की मतदाता सूची सार्वजनिक किए जाने के बाद पता चला है कि उस समय दर्ज 18 विधानसभा सीटें अब अस्तित्व में नहीं हैं। 2008 के परिसीमन (delimitation) में इन सीटों का नाम और उनका क्षेत्र (constituency boundaries) बदल दिए गए थे।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की तरफ से 2003 की वोटर लिस्ट वेबसाइट पर जारी कर दी गई है, ताकि यह तय किया जा सके कि 2003 में किसी व्यक्ति का वोट था या नहीं। लेकिन अब, यदि कोई वोटर अपनी वर्तमान विधानसभा सीट (जैसे धर्मपुर, रायपुर, देहरादून कैंट, थराली, चौबट्टाखाल आदि) से 2003 की सूची में नाम खोजता है, तो नहीं मिलेगा — क्योंकि उस समय ये क्षेत्र या नाम मौजूद नहीं थे।
नंद्रप्रयाग और पिंडर सीटें थीं — अब उनकी जगह थरالی है।
लक्ष्मणचौक और पुराने देहरादून विधानसभा क्षेत्र की सीटें — अब बदलकर धर्मपुर, रायपुर, उत्तराखंड और देहरादून कैंट हो चुकी हैं।
कई पुराने हरिद्वार, पौड़ी, नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा की सीटें इस सूची में शामिल थीं, जिनके नाम व सीमाएं अब बदल चुकी हैं या सीटें पूरी तरह समाप्त हो चुकी हैं।
इस बदलाव के कारण 2003-वाली मतदाता सूची में अपना नाम सामंजस्य से खोज पाना वर्तमान मतदाताओं के लिए चुनौतिपूर्ण हो गया है। इसलिए यदि आप अपनी 2003 की वोटर-आईडी या अन्य जानकारी नहीं रखते, तो CEO-UK की वेबसाइट पर “एडवांस सर्च” का उपयोग करना होगा — नाम, पिता का नाम, पोलिंग स्टेशन आदि विवरण देकर।
अहम बात: 2008 के परिसीमन के बाद विधानसभा की कुल सीटों की संख्या तो वही रही — लेकिन 18 सीटों का स्वरूप और पहचान बदल चुकी है। इसलिए 2003 की मतदाता सूची देख रहे मतदाता अब नई सीटों के नाम से खोजने पर भ्रमित हो सकते हैं।




