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राजाजी टाइगर रिजर्व (चिल्ला जोन): हाथी सफारी का पुनरारंभ

राजाजी टाइगर रिजर्व के चिल्ला जोन में बहु-वर्षीय विराम के बाद हाथी सफारी पुनः शुरू हो चुकी है। 2018 में रोक के बाद अब 15 नवंबर 2025 से दो हथिनियों — राधा और रंगीली — के माध्यम से जंगल सफारी का संचालन किया जा रहा है।

इस सफारी के शुरू होने के साथ ही चिल्ला हाथी शिविर के सात रेस्क्यू हाथियों — जिनमें बचाए गए गज शिशु और संघर्ष-ग्रस्त हाथी शामिल हैं — को नया जीवन मिला है। इनके क्रम में हथिनियाँ रानी, जॉनी, सुल्तान, कमल व “राजा” नामक युवा हाथी शामिल हैं।

राधा” अब 35 वर्ष की हो चुकी है; दिल्ली चिड़ियाघर से लाए गए 18-साल के राधा ने इन नव-बचाए हाथियों को अपनी ममता से पाला है। “रंगीली” अपने अनुशासित स्वभाव से समूह की दूसरी स्तंभ है।

यह सिर्फ एक पर्यटन पहल नहीं है। इस सफारी के पीछे है — संवेदना, देखभाल और पुनर्वास। जिन हाथियों को मानव–वन संघर्ष, जंगली हादसे या अनाथपन से बचाया गया, उन्हें अब एक सुरक्षित आश्रय और गरिमापूर्ण जीवन मिला है।

अधिकारी कहते हैं कि इस तरह की पहल दिखाती है कि “वन्यजीवन संरक्षण और पर्यटन साथ-साथ चल सकते हैं।” यह सफारी जंगल व वन्यजीवों के प्रति सम्मान, जागरूकता और जिम्मेदार पर्यटन की ओर एक मजबूत कदम है।

राधा या रंगीली पर बैठकर आगंतुक जंगल की गहराई में सफारी पर जाएँगे, जहाँ चीतल, सambar, मोर, जंगली हाथी, हिरण और विभिन्न पक्षियों सहित अन्य वन्य जीव देखने को मिल सकते हैं।

यह सफारी चिल्ला जोन के सीमित मार्ग (2–3 किलोमीटर) पर शुरू हुई है — जो धीरे-धीरे बेहतर व सुरक्षित मार्ग बनने के बाद विस्तारित होने की संभावना है।

“राजाजी में फिर गूँजी पगडंडी — सात रेस्क्यू हाथियों के साथ चिल्ला में हाथी सफारी की शुरुआत” “वन्यजीवन को बचाया, संवेदना का दिया जलाया — राधा-रंगीली की पीठ पर अब नया जीवन चला जंगल की राहों पर।”

यह कहानी सिर्फ पर्यटन से जुड़ी नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, मानवीय देखभाल और प्रकृति-सह-अस्तित्व की ताकत का प्रतीक है — जिसे पाठकों तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

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