हरिद्वार, 22 नवम्बर। एसएमजेएन महाविद्यालय में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ द्वारा ‘मानसिक तनाव प्रबंधन एवं परीक्षा पे चर्चा’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहन्त रविन्द्रपुरी ने कहा कि आज विश्वभर में एक अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से गुजर रहे हैं, जिसका व्यक्तियों, परिवारों और अर्थव्यवस्थाओं पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि तेज रफ्तार जीवनशैली, पढ़ाई का बढ़ता दबाव, दोस्तों का प्रभाव और सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग ने युवाओं, विशेषकर Gen Z, के मानसिक स्वास्थ्य को सबसे अधिक प्रभावित किया है।
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार बत्रा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल बीमारी न होना नहीं है, बल्कि भावनात्मक, शारीरिक, सामाजिक और आध्यात्मिक संतुलन का समग्र रूप है। उन्होंने सकारात्मक सोच, भावनात्मक संतुलन, आत्म-जागरूकता और सामाजिक जुड़ाव को मानसिक स्वास्थ्य के चार प्रमुख स्तंभ बताते हुए कहा कि शुरुआती संकेतों की पहचान और खुले संवाद से गंभीर समस्याओं को रोका जा सकता है।
अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. संजय कुमार माहेश्वरी ने कहा कि यह कार्यशाला मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यक्तिगत और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को समाज की वास्तविक आवश्यकताओं से जोड़ना समय की जरूरत है।
स्ट्रेस काउंसलर चारु सहगल ने परीक्षा संबंधी तनाव पर कहा कि पढ़ाई कठिन नहीं होती, बल्कि अनियंत्रित जीवनशैली इसे कठिन बनाती है। उन्होंने छात्रों को डिजिटल स्क्रीन से दूरी बनाने की सलाह दी। महाविद्यालय के चिकित्सक डॉ. प्रदीप त्यागी ने मानसिक तनाव के लक्षणों और बचाव उपायों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।
कार्यक्रम में मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सबका ध्यान आकर्षित किया। पूर्व छात्र मेहताब आलम ने ‘हमें तुमसे प्यार कितना’, छात्र चन्द्रकिरण ने ‘माई तेरी चुनरिया लहराई’ और पूर्व छात्रा शीना भटनागर ने सुरमयी प्रस्तुति देकर माहौल को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का संयोजन प्रो. विनय थपलियाल, डॉ. मीनाक्षी शर्मा और डॉ. पल्लवी द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. शिव कुमार चौहान, वैभव बत्रा, विनीत सक्सेना, पंकज भट्ट, डॉ. मोना शर्मा सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।




