25वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्साहपूर्ण भाषण देते हुए कहा कि यह “लंबी तपस्या का फल” है।
उन्होंने उल्लेख किया कि प्रदेश की विकास यात्रा “अद्भुत” रही है और यह हर उत्तराखंडी के संकल्प का नतीजा है।
उन्होंने गढ़वाली भाषा में जनता को अभिवादन करते हुए कहा, “देवभूमि उत्तराखंड का मेरा भाई बंधो, भैया भूली, आप सभी को मेरा नमस्कार।”
बताया कि पहले प्रदेश का बजट लगभग 4 हजार करोड़ था, अब यह एक लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है।
कहा कि उत्तराखंड अब ‘ऊर्जा प्रदेश’ बन चुका है—बिजली उत्पादन पहले की तुलना में चार गुना हो गया है।
सड़क नेटवर्क में भी वृद्धि हुई है—सड़कों की लंबाई दोगुनी हुई।
हवाई यात्रा को बढ़ावा मिला है — पहले 6 महीनों में ~4 हज़ार यात्री, अब रोजाना इतने ही विमान यात्रियों का आंकड़ा बना रहा है।
शिक्षा-स्वास्थ्य-पर्यटन-खेल के क्षेत्र में कई नए प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं—अब प्रदेश में 10 मेडिकल कॉलेज हैं, पहले एक था।
पहाड़ी पर्यटन, होमस्टे, स्थानीय त्योहारों (जैसे फूलदेई, हरेला) को ग्लोबल मैप पर दिखाने की बात भी उन्होंने कही।
साथ ही, मोदी ने आयोजन में प्रदेश को ₹8,260 करोड़ के विकास-परियोजनाओं की सौगात देने का संकल्प लिया, जिसमें जन जीवन से जुड़े जल-वित्त, ऊर्जा, शहरी विकास एवं खेल-शिक्षा शामिल हैं।
इस अवसर पर उन्होंने एक स्मारक डाक टिकट जारी किया और उपस्थित जनसमूह को सम्बोधित किया।




