जानकारी के अनुसार, आरएफआईडी टैग के माध्यम से प्रशासन को हर समय यह पता चल सकेगा कि कौन सा यात्री किस स्थान पर है और किसी भी समय कितने श्रद्धालु यात्रा मार्ग पर मौजूद हैं। इससे आपदा की स्थिति में त्वरित राहत व बचाव कार्य के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन में भी काफी मदद मिलेगी।
वर्तमान में चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण प्रणाली लागू है, जिसमें यात्रियों को अपनी यात्रा तिथि, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और अन्य विवरण देना होता है। इसके अलावा वाहनों के लिए ग्रीन कार्ड और यात्रियों के लिए ट्रिप कार्ड जैसी व्यवस्थाएं भी लागू हैं।
एनडीएमए के मुख्य सलाहकार ने सुझाव दिया है कि यात्रा मार्ग पर जगह-जगह आरएफआईडी रीडर लगाए जाएं, जिससे यात्रियों की लोकेशन ट्रैक की जा सके। इसके साथ ही 60 वर्ष से अधिक आयु के श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल प्रमाणपत्र अनिवार्य करने, सीसीटीवी फुटेज का एआई के जरिए विश्लेषण करने और हेलीकॉप्टर रेस्क्यू व्यवस्था को और मजबूत करने की भी सिफारिश की गई है।
आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सुझावों को संबंधित विभागों तक भेजा जा रहा है और जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा, जिससे चारधाम यात्रा को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।




