हरिद्वार, 22 मार्च। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संपर्क विभाग की ओर से होटल पार्क ग्रांट में मातृशक्ति गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें महिला वक्ताओं ने समाज निर्माण में नारी की भूमिका और योगदान पर विस्तृत चर्चा की।
मुख्य अतिथि शैफाली पंड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति की आधारशिला नारी है और देश में नारी को देवी स्वरूप माना जाता है। विवाह के बाद घर आने वाली कन्या को लक्ष्मी का रूप समझा जाता है तथा हर पूजा-अर्चना में देवी को सर्वोपरि स्थान दिया जाता है। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या पर चिंता जताते हुए कहा कि आज महिलाओं को और अधिक सशक्त होने की आवश्यकता है। देवी अनुसुईया का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नारियों में संकल्प शक्ति इतनी मजबूत होनी चाहिए कि वे अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए समाज की चुनौतियों का सामना कर सकें।
मुख्य वक्ता प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर ने संघ के शताब्दी वर्ष में चल रहे “पंच परिवर्तन” संकल्प पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारी इसके माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि कुटुंब प्रबोधन के जरिए पारिवारिक मूल्यों का संरक्षण, नागरिक कर्तव्य के प्रति जागरूकता, स्वबोध से आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता से एकता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को जीवन में उतारना आवश्यक है।
डॉ. तृप्ता ने कहा कि मातृशक्ति न केवल संस्कृति की आधारशिला है, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। माताएं अपने बच्चों को संस्कार और जीवन मूल्यों की शिक्षा देकर समाज को सशक्त दिशा प्रदान करती हैं। इसलिए समाज को मातृशक्ति का सम्मान और उनके योगदान की पहचान करनी चाहिए।
समाजसेवी अर्चना जैन ने भी मातृशक्ति के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की शुरुआत प्रांत संपर्क प्रमुख सीए अनिल वर्मा ने संघ की 100 वर्षों की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए की। संचालन डॉ. कल्पना चौधरी ने किया।
इस अवसर पर राष्ट्र सेविका समिति की वंदना, ममता, अंजली माहेश्वरी, डॉ. अश्वनी चौहान, डॉ. प्रितशिखा शर्मा, विजय लक्ष्मी, नीलिमा, पद्मनी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रहीं। साथ ही विभाग संपर्क प्रमुख कुंवर रोहिताश, विशेष श्रेणी संपर्क प्रमुख संजय पंवार, जिला संपर्क प्रमुख अमित चौहान, नगर संपर्क प्रमुख सुशील सैनी सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।




