उत्तराखंड में फायर सीजन शुरू होते ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। बीते 27 दिनों में प्रदेश में वनाग्नि की 73 घटनाएं सामने आई हैं, जिससे वन विभाग की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार 15 फरवरी से 13 मार्च के बीच हुई इन घटनाओं में गढ़वाल क्षेत्र में 70 और वन्यजीव क्षेत्रों में तीन घटनाएं दर्ज की गईं। इन आग की घटनाओं से 36 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र की संपदा को नुकसान पहुंचा है।
दिलचस्प बात यह है कि वन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर कुमाऊं क्षेत्र में आग की घटनाएं शून्य दर्शाई जा रही हैं, जबकि जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं।
तापमान बढ़ने और जंगलों में सूखी घास व चीड़ की पत्तियों के कारण आग तेजी से फैल रही है। वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर आग बुझाने में जुटी हैं, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों के कारण आग पर काबू पाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते प्रभावी रोकथाम और निगरानी नहीं की गई तो आने वाले महीनों में जंगल की आग की घटनाएं और बढ़ सकती हैं।




