लोकसभा के बाहर बुधवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री और पूर्व कांग्रेस सांसद रवनीत सिंह बिट्टू को “traitor (गद्दार)” कहा था। राहुल ने बातचीत में बिट्टू को “मेरे गद्दार दोस्त” कहकर हाथ मिलाने का इशारा भी किया, लेकिन बिट्टू ने हाथ मिलाने से इनकार कर “देश का दुश्मन” करार दे दिया। यह विवाद संसद परिसर के मुख्य द्वार पर कैमरे में कैद हुआ और तेजी से राजनीतिक बहस का कारण बन गया।
इस बयान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि ऐसे आरोप देश की राजनीतिक संस्कृति के लिए नुकसानदेह हैं। मोदी ने राहुल गांधी के बयान को प्रवंचनात्मक और विभाजनकारी बताया और उन पर संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति सम्मान की कमी का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सम्मानजनक प्रश्न उठाने की होती है, लेकिन अभद्र भाषा का उपयोग नहीं किया जाना चाहिए।
भाजपा नेताओं की टिप्पणियाँ:
पार्टी के राष्ट्रीय महामंत्री तरुण चुघ ने राहुल गांधी के बयान को “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण” तथा सिख समुदाय की गरिमा के लिए अपमानजनक बताया है और सार्वजनिक माफी की मांग की है।
पंजाब भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा ने कहा कि यह टिप्पणी कांग्रेस की “राजनीतिक विफलता” को छिपाने का एक प्रयास है।
वहीं, कांग्रेस में भी दोराहा रुख देखने को मिला है। कुछ नेताओं ने बिट्टू के कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने को विश्वासघात बताया है, जबकि अन्य ने राहुल के बयान को राजनीतिक रणनीति करार दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह विवाद आगामी चुनावी माहौल में विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच जारी तनाव का एक नया प्रमाण बन गया है।




