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03 फरवरी 2026– केंद्रीय बजट 2026-27 में सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी की घोषणा के बाद शेयर बाजार में बढ़ी बेचैनी ने निवेशकों को चिंतित कर दिया है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शन्स (F&O) ट्रेडिंग पर STT दर बढ़ाने की घोषणा की, जिसका उद्देश्य सट्टेबाजी(स्पेकुलेशन) को नियंत्रित करना बताया गया है।

बाजार पहले से ही वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के दबाव में कमजोर था। ऐसे में STT वृद्धि ने निवेशकों की सतर्कता और बढ़ा दी है।

निवेशकों के अनुसार, ट्रेडिंग लागत बढ़ने से बाजार तरलता दब सकती है, जिससे कारोबारी गतिविधियों पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना है।

💡 विशेषज्ञों का मत

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि STT में बढ़ोतरी से डेरिवेटिव ट्रेडिंग की मात्रा लगभग 5% तक कम हो सकती है, जिससे शेयर एक्सचेंज और ब्रोकरेज कंपनियों की आय पर दबाव बनेगा।

कुछ विश्लेषकों ने यह भी कहा कि STT वृद्धि से निवेशकों की लंबी अवधि की रणनीतियाँ और जोखिम प्रबंधन प्रभावित हो सकते हैं, खासकर उन निवेशकों के लिए जो हेजिंग के लिए F&O का उपयोग करते हैं।

📌 सरकार का दृष्टिकोण

राजस्व सचिव ने स्पष्ट किया है कि STT में यह बदलाव केवल F&O सेगमेंट तक ही सीमित है, और इसका मकसद जोखिम भरी सट्टेबाजी को रोकना तथा छोटे निवेशकों को बचाना है।

वित्त मंत्री का कहना है कि डेरिवेटिव बाजार में अत्यधिक सट्टेबाजी से निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है, इसलिए यह कदम आवश्यक था।

🧠 निष्कर्ष

STT में बढ़ोतरी ने निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों में मतभेद खड़े कर दिए हैं – जहां सरकार इसे स्पेकुलेटिव ट्रेडिंग को नियंत्रित करने वाला उपाय मान रही है, वहीं बाजार इसे व्यापार लागत बढ़ाने और कारोबार पर नकारात्मक प्रभाव डालने वाला कदम बता रहे हैं। आगामी समय में इस फैसले के लंबी अवधि के प्रभाव और बाजार की प्रतिक्रिया पर नजर बनी रहेगी।

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