देहरादून, 01 फरवरी 2026 — देहरादून की एक अदालत ने एक दशक पुराने सनसनीखेज विदेशी छात्रा से दुष्कर्म के मामले में आरोपी छात्र को बरी कर दिया है, जिससे न्याय व्यवस्था और पुलिस जांच की निष्पक्षता पर भारी सवाल उठ रहे हैं।
मामला अक्टूबर 2024 का है, जब एक विदेशी छात्रा ने अपने विश्वविद्यालय के समारोह के बाद सो रही अवस्था में साथी छात्र पर दुष्कर्म का आरोप लगाया था। यह FIR जीरो FIR के रूप में दिल्ली के कश्मीरी गेट थाने में दर्ज किया गया था और बाद में देहरादून पुलिस को विवेचना के लिए भेजा गया।
मुख्य फ़ैसला:
क्लेमेंटटाउन की अदालत ने आरोपी दक्षिण सूडान के छात्र — मूसा उर्फ मोजा मोजिज लाडू जेम्स को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
पुलिस जांच पर हाईकोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने विशेष रूप से जांच अधिकारी पर कड़ी टिप्पणी की, यह कहते हुए कि उन्होंने साइंटिफिक सबूतों का पर्याप्त उपयोग नहीं किया। मामले में बलात्कार के समय बिस्तर की चादर, कपड़े और अन्य फॉरेंसिक सबूत जुटाने का सामान्य प्रोटोकॉल भी पालन नहीं किया गया।
प्रतिवादी पक्ष की जिरह:
सुनवाई के दौरान पीड़िता ने बताया कि पार्टी के बाद नशे में होने के कारण उन्हें याद नहीं कि किसने कब और कैसे स्पर्श किया। साथ ही, पार्टी के अन्य छात्रों ने गवाही दी कि पीड़िता और आरोपी अलग-अलग कमरों में सोए थे।
नीतिगत प्रश्न:
यह फैसला पुलिस जांच प्रक्रिया, सबूतों के संकलन और विदेशी/स्थानीय छात्रों के मामलों में न्याय की उपलब्धता पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।




