शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर एवं श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज को शनिवार को उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड सीमा पर उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार जाने से रोक दिया। वे अपने सहयोगियों के साथ हरिद्वार के सर्वानंद घाट पर प्रस्तावित एक दिवसीय सांकेतिक उपवास में भाग लेने जा रहे थे।
महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी के साथ वर्ल्ड रिलिजियस कन्वेंशन की मुख्य संयोजक डॉ. उदिता त्यागी, यति रणसिंहानंद जी, यति अभयानंद जी, यति धर्मानंद जी, मोहित बजरंगी तथा डॉ. योगेन्द्र योगी भी मौजूद थे। पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद उन्होंने इसे अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया और विरोध दर्ज कराया।
महामंडलेश्वर ने कहा कि उनका उपवास यूजीसी एक्ट को लेकर संत समाज की चुप्पी के विरोध में प्रस्तावित था। उन्होंने संत समाज से इस विषय पर खुलकर विचार व्यक्त करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर मौन रहने से समाज में विभाजन की स्थिति बन सकती है।
उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि यूजीसी एक्ट के पीछे विदेशी शक्तियों की साजिश हो सकती है और इससे सामाजिक समरसता प्रभावित होने का खतरा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी दिल्ली के जंतर-मंतर पर इसी विषय को लेकर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे थे, लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने शिवशक्ति धाम डासना परिसर में सुरक्षा कारणों से उन्हें वहीं रोके रखा था।
प्रशासन की ओर से इस मामले में अब तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।




