बसंत पंचमी के पावन अवसर पर ज्ञान और विद्या की देवी माँ सरस्वती की उपासना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए अंतरराष्ट्रीय संत स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि माँ सरस्वती केवल किताबी ज्ञान की देवी नहीं हैं, बल्कि बुद्धि की शुद्धता, विनम्रता और श्रेष्ठ आचरण की अधिष्ठात्री देवी हैं।
श्री तपो निधि पंचायती अखाड़ा निरंजनी, मायापुर (हरिद्वार) से संबद्ध तथा शिव शक्ति मेडिटेशन सेंटर, साउथ अफ्रीका के संस्थापक अध्यक्ष स्वामी रामभजन वन महाराज ने अपने दिव्य प्रवचन में कहा कि बसंत पंचमी नई चेतना, सृजन और आध्यात्मिक जागृति का पर्व है। यह दिन मानव जीवन से अज्ञान, अहंकार और नकारात्मकता को दूर कर ज्ञान के प्रकाश को अपनाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल आजीविका अर्जन नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, समाज सेवा और राष्ट्र कल्याण होना चाहिए। महाराज श्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को जीवन मूल्यों से जोड़ें और ज्ञान को सेवा, करुणा तथा सदाचार का माध्यम बनाएं।
स्वामी रामभजन वन महाराज ने कहा कि जब ज्ञान और आध्यात्मिक साधना का समन्वय होता है, तभी जीवन में संतुलन और सार्थकता आती है। उन्होंनेमाँ शारदा से बुद्धि की पवित्रता, वाणी में मधुरता औरधर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करने की कृपा करें




